लोग ठगी करने के नए-नए तरीके अपना रहे हैं। पहले जान पहचान बढ़ाते हैं। भरोसा जीतने के बाद मकान बेचने और मजबूरी का बहाना बनाकर धोखाधड़ी से रकम ले लेते हैं। वापस मांगने पर झूठे केस में फंसाने की धमकी देकर लौटाने से मना कर देते हैं। पीड़ितों की शिकायत पर शहर के अलग-अलग थानों में पुलिस ने केस दर्ज किए हैं। जांच चल रही है।
केस:-1 थाना सदर में दर्ज केस के अनुसार सिंगी का नगला निवासी रिटायर्ड सीआईएसएफ के जवान महेंद्रपाल ने तहरीर दी। 20 जनवरी को वह अपने खाते से 2 लाख रुपये निकालने के लिए बैंक पहुंचे थे। बैंक कर्मचारी ने खाते में रकम न होने का हवाला दिया। उन्होंने स्टेटमेंट निकलवाया। तब पता चला कि 5 महीने पहले उनके मकान में अमित और उसकी पत्नी प्रिंसी किराए पर रहने आए थे। उन्होंने भरोसा जीतकर मोबाइल पर बात करने के बहाने यूपीआई आईडी से कई बार में 3.49 लाख रुपये ट्रांसफर कर लिए। रुपये ट्रांसफर होते ही 10 दिन पहले कमरा खाली कर चले गए।
केस:-2 थाना सदर में दर्ज केस के अनुसार सेवला ओम साईं स्टेट काॅलोनी निवासी फौजी त्रिलोकचंद पाराशर ने तहरीर दी। थाना ताजगंज क्षेत्र के शारदा रेजीडेंसी निवासी हर्षवर्धन थापा से उनकी जान पहचान थी। इस वजह से उन्होंने हर्षवर्धन और उसकी बहन वैष्णवी ने एक मकान का सौदा किया। दोनों भाई बहन ने मिलकर फरवरी 2025 से 8 मार्च 2025 तक 4 बार में 1.95 लाख रुपये ले लिए। 10 मार्च को सदर तहसील में बैनामा करने पहुंचे तो 3 लाख वहां ले लिए। जब अधिवक्ता ने बैनामा कराने के लिए असली रजिस्ट्री की मांग की तो वैष्णवी का पति विकास आ गया। कहा कि रजिस्ट्री अभी लेकर आता हूं। रुपये लेने के बाद कोई लौटकर नहीं आया। जानकारी करने पर पता चला कि हर्षवर्धन ने बहन और बहनोई के साथ मिलकर उनसे रुपये लेकर मकान का बैनामा किसी अन्य व्यक्ति के नाम कर दिया।
केस:-3 थाना सिकंदरा में दर्ज केस के अनुसार विनायक नगर निवासी बुजुर्ग महिला पुष्पा ने तहरीर दी। तबीयत खराब होने पर भतीजा राहुल कश्यप उनके पास आया। सेवा करने का भरोसा देकर अपने घर ले गया। 22 फरवरी को धोखे से उनके मकान की गिफ्ट डीड करा ली। तबीयत में सुधार होने पर वह अपने घर आ गईं। भतीजे से गिफ्ट डीड खारिज करने के लिए कहा तो उसने मना कर दिया।