फर्जीवाड़े के लिए ये किया
आगरा नगर निगम की छत पर प्रदूषण मापने के सेंसर और उपकरण लगे हैं। यहां पानी की एक हजार लीटर की टंकी रखी गई है, जिससे 20 फीट ऊंचा एक पाइप लगाया गया है, जिसमें दो स्प्रिंकलर लगे हैं। नीचे पानी लिफ्ट करने के लिए एक मोटर लगी है, जो पूरे दिन टंकी से पानी लेकर स्प्रिंकलर के जरिए सेंसर और उपकरणों के पास छिड़काव करती रहती है। इससे धूल कण और सूक्ष्म कणों की माप बेहद कम आ रही है। सिर्फ इन उपकरणों तक पानी के छिड़काव के लिए पानी की टंकी लगाई गई है, जबकि निगम के टॉयलेट को सप्लाई देने वाली टंकियां पार्किंग की ओर लगी हैं।
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मामला है क्या
शहर के चिकित्सकों के पास सांस, अस्थमा के रोगियों की संख्या में 40 फीसदी का इजाफा हुआ है, लेकिन शहर की हवा की गुणवत्ता बताने वाले ऑटोमैटिक स्टेशनों के आंकड़े ऐसे हैं, जैसे मानसून की स्वच्छ हवा हो। मेडिकल कॉलेज में इलाज के लिए पहुंच रहे मरीजों को स्मॉग के कारण आंखों में जलन और चुभन महसूस होती है, लेकिन केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के समीर एप पर आगरा की हवा मानसून जैसी अच्छी बताई जा रही है। शहर में कचरा जलाने, देहात में पराली जलाने की घटनाएं हो रहीं हैं और सुबह स्मॉग की सफेद चादर स्पष्ट दिखती है, पर आंकड़ों में आगरा की हवा बेहद अच्छी बताई जा रही है
आगरा मॉडल की हर जगह चर्चा
दो साल से आगरा मॉडल की चर्चा पूरे प्रदेश के अधिकारी कर रहे हैं। साल 2023 से पहले आगरा में नवंबर से जनवरी के बीच एक्यूआई बेहद खराब और 350 से 495 के बीच रहता था, लेकिन दो साल से आंकड़े ही बदल गए। सरकारी बैठकों में प्रदेश के अन्य अधिकारियों को भी आगरा मॉडल अपनाने को कहा जा रहा है, जिससे आंकड़ों में एक साल में ही प्रदूषण घटकर दसवें हिस्से तक ही रह गया।
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