आगरा में खारे भूजल पर निर्भर शहर की प्यास 15 साल से गंगाजल के लिए तड़प रही है। पांच साल पहले गंगाजल आगरा आ गया, लेकिन हर घर में नहीं पहुंचा। 3000 करोड़ रुपये से अधिक गंगाजल में बह गए। फिर भी 2 लाख घर पानी को तरस रहे हैं। इन गर्मियों में भी उन्हें राहत नहीं मिलेगी। क्यों कि शहर में करीब 10 लाख आबादी तक पानी पहुंचाने के लिए एक हजार करोड़ रुपये की योजनाएं प्रस्तावित हैं। इनके लिए दो से तीन साल इंतजार करना पड़ेगा।
शाहगंज पंपिंग स्टेशन पर पाइप लाइन इंटरकनेक्शन कार्य की वजह से 20 हजार से अधिक घरों की सप्लाई बृहस्पतिवार से बंद हो गई। 7 अप्रैल तक जल निगम ने क्लोजर लिया है। रुई की मंडी, शाहगंज, भोगीपुरा, ईदगाह, अर्जुन नगर में लोग पानी को तरस गए। अयोध्या कुंज निवासी राजकुमार नागरथ ने बताया कि वैकल्पिक सप्लाई के लिए पानी के टैंकर भी नहीं पहुंचे। रुई की मंडी निवासी मालती देवी ने बताया दिनभर लोग पानी को भटकते रहे हैं।
दयालबाग की 34 काॅलोनियों में पानी नहीं है। 2.84 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी लोगों को राहत नहीं मिली। इसके विरोध में बृहस्पतिवार को पंजाबी बाग, तुलसी बाग की महिलाओं ने नगर निगम में विरोध प्रदर्शन करते हुए भूख हड़ताल पर बैठ गए। मुख्य अभियंता बीएल गुप्ता से नोकझोंक हुई। उन्होंने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में सप्लाई के लिए प्रस्ताव भेजा जा चुका है। सौरभ चौधरी ने कहा कि 48 घंटे में पानी की व्यवस्था नहीं की गई तो मंडलायुक्त कार्यालय पर भूख हड़ताल करेंगे।