आगरा। आंगनबाड़ी केंद्रों पर गर्भवती महिलाओं व बच्चों के लिए मुफ्त बांटे जाने वाले पुष्टाहार के वितरण में हुए घोटाले के बाद हुई कार्रवाई के बावजूद हेराफेरी का खेल नहीं रुक रहा है। बिना स्वयं सहायता समूह के सैंया में गोदाम से लोडिंग ऑटो में पुष्टाहार लादकर ले जाया जा रहा था।
मामला सैंया बाल विकास परियोजना का है। शुक्रवार को सैंया स्थित गोदाम से पुष्टाहार का उठान ऑटो चालक कर रहा था। सूचना पर आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष डालचंद्र पहुंचे। उन्होंने आरोप लगाए कि पुष्टाहार को ऑटो में लादकर बाजार में बेचने के लिए ले जाया जा रहा था। जबकि, उठान सिर्फ स्वयं सहायता समूह कर सकते हैं।
डालचंद्र ने डीपीओ मनोज मौर्य को सूचित किया। डीपीओ मौके पर पहुंचे। वीडियो बनाने का विरोध किया। डालचंद्र का कहना है कि मामले की शिकायत मुख्यमंत्री से की जाएगी। वहीं, इस संबंध में डीपीओ मनोज मौर्य का कहना है कि स्वयं सहायता समूह उठान के समय मौजूद था या नहीं, इसकी जांच कराई जाएगी।
वहीं डालचंद्र का कहना है कि अक्तूबर 2024 में पुष्टाहार एक राशन विक्रेता के गोदाम में भरा मिला था। जांच में पता चला कि वितरण के नाम पर घोटाला हो रहा था। सीएम तक मामला पहुंचने के बाद तत्कालीन डीपीओ आदिश मिश्रा, सीडीपीओ विमल चौबे सहित 15 सुपरवाइजर व आंगनबाड़ी कार्यकर्ता निलंबित हुए थे। अब फिर पुष्टाहार वितरण के नाम पर उच्च अधिकारियों को गुमराह करने के आरोप भी विभागीय अधिकारियों पर लग रहे हैं।