कासगंज। आज जेल यातना केंद्रों के रूप में नहीं बल्कि सुधारगृहों के रूप में पहचानी जाने लगी हैं। पिछले 15 साल से जेल सुधार के क्षेत्र में कार्य कर रहे डॉ. प्रदीप रघुनंदन की पहल ने कासगंज जेल के बंदियों की सोच बदल दी। नतीजा रहा कि सलाखों के पीछे रहकर बंदियों ने विभिन्न विषयों पर निबंध लिख डाले। बंदियों की रचनाओं को महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने सम्मान दिया है। उन्होंने निबंध संग्रह ‘उजालों की ओर’ पुस्तिका का विमोचन किया है।
जेल में बंदियों को सुधार के लिए राष्ट्रीय युवा शक्ति प्रमुख और जेल सुधारक लंबे समय से कार्य कर रहे हैं। जेल सुधारक डॉ. प्रदीप रघुनंदन ने एक अभियान छेड़ा और बंदियों को अपराध की दुनिया छोड़कर नित नए बेहतर रास्तों पर चलने की सीख दी। उनकी इस पहल का सकारात्मक नतीजा निकला। बंदियों ने पर्यावरण संरक्षण, बेटी बचाओ, महिला सशक्तिकरण, जल संरक्षण, राष्ट्रीय चेतना जैसे विषयों पर अपने रचनात्मक लेख लिखे हैं। इसका संकलन पुस्तिका निबंध संग्रह उजालों की ओर में किया गया। इस पुस्तिका के विमोचन के लिए जेल सुधारक ने महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से समय लिया। कासगंज से पहुंचे बाल कल्याण समिति न्यायपीठ के अध्यक्ष प्रवीन कुमार शर्मा और जेल सुधारक डॉ. प्रदीप रघुनंदन राज्यपाल से निर्धारित समय पर मिले। वहां महाराष्ट्र के राज्यपाल ने पुस्तिका निबंध संग्रह ‘उजाला की ओर’ का विमोचन किया। राज्यपाल ने इस पुस्तिका में संकलित किए गए निबंधों को बंदियों के सुधार के लिए बड़ी उपलब्धि बताई। पुस्तिका विमोचन के दौरान महाराष्ट्र के राज्यपाल के एडीसी कमल घंडियाल, राजभवन के छायाकार पराग कुलकर्णी, राजभवन सहायक नीलेश कुमार, संजीव शर्मा मौजूद रहे।