ताजनगरी के उद्यमियों पर आयकर के दनादन सर्वे के विरोध में उद्यमियों का प्रतिनिधिमंडल दिल्ली जाकर सीबीडीटी (सेंट्रल बोर्ड आफ डायरेक्ट टैक्सेज) चेयरमैन से मिला। उन्होंने आगरा का आयकर लक्ष्य कम करने की मांग की। उन्होंने टीटीजेड में नए उद्योगों के न लगने का आदेश और जूता निर्यात में 20 फीसदी की गिरावट के आंकड़े उपलब्ध कराए।
सीबीडीटी चेयरमैन अतुलेश जिंदल से मिलने के बाद आगरा लौटे नेशनल चेंबर अध्यक्ष भुवेश अग्रवाल, एफमेक अध्यक्ष पूरन डावर, एडवोकेट अनिल वर्मा ने बुधवार को प्रेसवार्ता में बताया कि आयकर विभाग द्वारा 50 से ज्यादा सर्वे करने और अनुचित दबाव डालकर रकम सरेंडर कराने की जानकारी चेयरमैन को दी गई है। देश में इतने सर्वे किसी शहर में नहीं हुए। ज्यादा टैक्स देने वालों पर ही सर्वे किए गए हैं। प्रतिनिधिमंडल ने रीजनल डायरेक्ट टैक्स एडवाइजरी कमेटी के गठन की मांग की।
‘नेता-महात्मा-अफसरों पर भी डाले जाएं छापे’
एडवोकेट अनिल वर्मा ने कहा कि जितने छापे व्यापारियों के यहां डाले जा रहे हैं, उसके आधे भी अगर नेताओं, महात्माओं और सरकारी अधिकारियों पर डाले जाएं तो आयकर विभाग टारगेट से ज्यादा टैक्स वसूल लेगा, लेकिन किसी भी नेता या अधिकारी पर सर्वे की कार्रवाई नहीं की जाती है। जबकि इनकी संपत्ति दिन दूनी, रात चौगुनी बढ़ रही है। वार्ता में नेशनल चेंबर के नवनिर्वाचित अध्यक्ष अशोक गोयल, राजेश गोयल, अमर मित्तल, नरिंदर सिंह, कैप्टन एएस राणा आदि मौजूद रहे।
मंटोला है टैक्स फ्री जोन
आगरा। एक तरफ उद्यमियों, व्यापारियों पर छापे डाले जा रहे हैं तो वहीं मंटोला में जूते की फै क्ट्रियों पर न तो वाणिज्य कर विभाग की नजर है और न ही बिजली विभाग बिल वसूल पा रहा है। इसी तरह न जलकल, न सीवर टैक्स और न ही सेंट्रल एक्साइज। आयकर रिटर्न तो इन फैक्ट्रियों में दूर की कौड़ी है। मंटोला, ढोलीखार में बड़े पैमाने पर जूते की फैक्ट्रियां हैं, जो हजारों जोड़ी रोज बनाती हैं, लेकिन इनमें से कोई भी टैक्स नहीं दे रहा। फाउंड्री नगर, यूपीएसआईडीसी और हाईवे के उद्यमी इसीलिए मंटोला को टैक्स फ्री यानी अघोषित एसईजेड (स्पेशल इकोनोमिक जोन) का नाम देते रहे हैं।