ब्राह्मण अखाड़ा पिछले कई वर्षों से संचालित है और यहां पर पहलवान कुश्ती का अभ्यास करते हैं। इंग्लैंड से आए इस पहलवान ने जब अखाड़े में देसी पहलवानों को अभ्यास करते देखा तो उसमें भी दंगल का जुनून जाग उठा। उसने अखाड़े के गुरुओं से अनुमति ली और पारंपरिक लंगोट पहनकर खुद भी अखाड़े में उतर गया। जैसे ही विदेशी रेसलर ने अखाड़े में कदम रखा, वहां मौजूद दर्शकों की उत्सुकता बढ़ गई। एक अनुभवी भारतीय पहलवान को उसके मुकाबले के लिए बुलाया गया। दोनों ने पारंपरिक अंदाज में एक-दूसरे का अभिवादन किया और फिर मुकाबला शुरू हुआ।
विदेशी पहलवान ने अपनी आधुनिक कुश्ती तकनीकों का उपयोग किया, लेकिन भारतीय पहलवान के पारंपरिक दांव-पेचों के आगे उसकी एक न चली। भारतीय पहलवान ने न केवल शानदार तरीके से मुकाबला किया, बल्कि अपने देसी गुरों से विदेशी पहलवान को हैरान कर दिया। कुछ ही मिनटों में विदेशी पहलवान चारों खाने चित हो गया।
हार के बावजूद इंग्लैंड से आए इस पहलवान ने भारतीय कुश्ती की प्रशंसा की। उसने स्वीकार किया कि भारतीय पहलवानी का तरीका बेहद प्रभावशाली और शक्तिशाली है। मुकाबले के बाद उसने कहा कि वह अपने देश इंग्लैंड में भारतीय कुश्ती की कला और उसके पारंपरिक दांव-पेचों का प्रचार करेगा।