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ऊर्जा मंत्री ने किए बांकेबिहारी के दर्शन: मंदिर परिसर में दोना-पत्तल बिखरे देख जताई नाराजगी, खुद उठाकर कूड़ेदान में डाले

Fri, 06 Aug 2021 06:10 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क अमर उजाला, मथुरा-वृंदावन

सार

श्री बांकेबिहारी और श्रीराधावल्लभ मंदिर में दर्शन बाद ऊर्जा मंत्री ने कई स्थानों पर पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। 
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बांकेबिहारी मंदिर में ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मथुरा के वृंदावन में ऊर्जा मंत्री और क्षेत्रीय विधायक श्रीकांत शर्मा ने शुक्रवार को सुबह श्री बांकेबिहारी मंदिर में ठाकुर जी के दर्शन किए। इस दौरान मंदिर परिसर में दोना-पत्तल बिखरे देख ऊर्जा मंत्री ने नाराजगी जताई। उन्होंने खुद ही दोना-पत्तल उठाकर स्वच्छता का संदेश दिया। इसके बाद कई स्थानों पर पौधारोपण भी किया।

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शुक्रवार को वृंदावन पहुंचे ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा का नगर निगम में उपसभापति राधाकृष्ण पाठक, भाजपा नगर अध्यक्ष विनीत शर्मा के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ताओं ने स्वागत किया। इसके बाद ऊर्जा मंत्री ने श्रीबांकेबिहारी मंदिर में पहुंच कर ठाकुर जी के दर्शन किए। 

मंदिर सेवायत ज्ञानेंद्र किशोर गोस्वामी ने श्रीकांत शर्मा को विधिवत पूजा अर्चना कराई। मंदिर से बाहर निकलकर परिसर में फूल मालाएं रखने के लिए उपयोग में लाए जाने वाले दोना-पत्तल इधर-उधर बिखरे देख उन्होंने नाराजगी जताई। इसके बाद खुद ही दोना-पत्तल उठाकर कूड़ेदान में डाले।

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लोगों से की स्वच्छता की अपील
ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने लोगों से अपील की कि स्वच्छता हमारी भी जिम्मेदारी है। ठाकुर जी के द्वार को भी हम खुद ही इस तरह गंदा कर रहे हैं। ऐसा न करें। मंदिर परिसर को साफ-स्वच्छ रखें। इस दौरान ऊर्जामंत्री को मंदिर परिसर में दौना पत्तल उठाते देख अफसरों में खलबली मच गई। 

बिहारी जी दर्शन के बाद ऊर्जा मंत्री ने श्रीराधावल्लभ मंदिर में दर्शन किए। यहां भी पूजा अर्चन किया। तदोपरांत देवरहा बाबा आश्रम पहुंचकर दर्शन किए। यहां पौधारोपण के बाद पागल बाबा मंदिर मार्केट में भी पौधा लगाया। प्रेममंदिर के निकट वनभूमि परा भी पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दोहराया। 

उन्होंने कहा कि भविष्य में हमारी आने वाली पीढ़ी को पर्यावरण संबंधी विषम परिस्थितियों का सामना करना पड़ेगा। इससे बचने के लिये हमें मिलजुल कर प्रयास करने होंगे। उन्होंने कहा कि वृंदावन को हरित वृंदावन का स्वरूप देना है। इसके लिए यमुना के किनारे पौधे लगाए जा रहे हैं। 
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