मैनपुरी। पुलिसकर्मियों की हत्या करने वाले कई अपराधियों को मैनपुरी पुलिस मुठभेड़ में मार चुकी है। 80 और 90 के दशक में कई मुठभेड़ हुईं जिनमें पुलिस ने कई अपराधियों को मार गिराने का दावा किया था। हालांकि पुलिस द्वारा एक के बाद एक किए गए एनकाउंटरों पर सवाल भी उठे। मारे गए लोगों के परिजनों की शिकायतों पर सीबीसीआईडी जांच तक हुई। एनकाउंटर करने वाली पुलिस टीम को कभी क्लीन चिट मिली तो कभी पुलिस की ये कार्रवाई जांच के घेरे में आई। कानपुर में विकास दुबे के एनकांउटर ने लोगों को चार दशक पहले की याद दिला दी।
केसहिस्ट्री-
एक वर्ष 1980 में शहर के मोहल्ला सराउग्यान में पुलिस ने कुलभूषण सिंह की तलाश में उसके घर पर दबिश दी। अपराधी द्वारा की गई फायरिंग में एक सिपाही मारा गया। पुलिस ने एनकाउंटर करके अपराधी के पिता कलक्ट्रेट कर्मचारी शिवपाल सिंह और उसके दो भाइयों को मारने का दावा किया। इस मामले में पीड़ित परिवार द्वारा मुठभेड़ के नाम पर घर से ले जाकर हत्या करने की शिकायत पर सीबीसीआईडी जांच हुई। सीबीसीआईडी ने जांच के बाद पुलिस टीम को क्लीन चिट दे दी।
केस हिस्ट्री-दो
वर्ष 1980 में मोहल्ला सोतियाना निवासी रमाकांत पाठक का कोतवाली पुलिस ने एनकाउंटर किया था। रमाकांत के पिता की शिकायत पर हुई सीबीसीआईडी जांच में तत्कालीन सीओ शीलभद्र धर द्विवेदी, इंस्पेक्टर प्रमेंद्र सिंह, एसआई होतीलाल यादव, महावीर सिंह, वीरेंद्र सिंह, सतीश मोहन गोस्वामी, मोहर सिंह वर्मा, कांस्टेबल गेंदालाल, रामलाल, ध्रुव नरायन, चंद्रभान, जीप चालक राजपाल सिंह को रमाकांत को घर से ले जाकर हत्या करने का दोषी पाया गया था। यह मामला सीजेएम कोर्ट में विचाराधीन है। आरोपी तत्कालीन सीओ सिटी शीलभद्र धर द्विवेदी, इंस्पेक्टर कोतवाली प्रमेंद्र सिंह, एक दरोगा सहित रमाकांत के पिता की मौत भी हो चुकी है।
केसहिस्ट्री-तीन
वर्ष 2005 में बरनाहल थाने में तैनात सिपाही राजेश यादव की अपराधियों ने हत्या कर दी। पुलिस ने अपराधियों की घेराबंदी की। घटना के समय बरनाहल थानाध्यक्ष रहे बेनीमाधव त्रिपाठी इसी बीच एसओजी प्रभारी बन गए। एसओजी टीम ने मुठभेड़ के बाद राजेश यादव की हत्या करने वाले अपराधी मनीष नाई को थाना दन्नाहार क्षेत्र में मुठभेड़ में मार दिया। मनीष के साथी बाले का फिरोजाबाद में एनकाउंटर कर दिया गया।