आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों में स्नातक प्रथम वर्ष के बीए, बीएससी, बीकॉम पाठ्यक्रमों में पंजीकृत छात्र-छात्राओं को नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत पहले दो वर्षों (चार सेमेस्टर) में रोजगारपरक पाठ्यक्रम पढ़ना होगा। विश्वविद्यालय की ओर से तैयार किए गए अध्यादेश के अनुसार प्रत्येक सेमेस्टर में तीन क्रेडिट का रोजगारपरक पाठ्यक्रम होगा। एक वर्ष (दो सेमेस्टर) में छह क्रेडिट और चार सेमेस्टर में रोजगारपरक पाठ्यक्रम पढ़ने पर 12 क्रेडिट छात्र-छात्राओं को प्राप्त होंगे।
विश्वविद्यालय के आईक्यूएसी के निदेशक प्रो. अजय तनेजा ने बताया कि क्रेडिट किसी पाठ्यक्रम में पढ़ाई के घंटे के आधार पर दिया जाता है। यूजीसी के नियमानुसार 15 घंटे का एक क्रेडिट होता है। तीन क्रेडिट कोर्स के लिए 45 घंटे की पढ़ाई होनी चाहिए। इसमें प्रयोगात्मक भी शामिल है। निर्धारित घंटे की पढ़ाई करने पर ही छात्र-छात्राओं को क्रेडिट प्राप्त होगा। चार क्रेडिट कोर्स के लिए 60 घंटे की पढ़ाई जरूरी है। स्नातक प्रथम वर्ष के लिए 46, द्वितीय वर्ष के लिए 46, तृतीय वर्ष के लिए 40 और चतुर्थ वर्ष के लिए 54 क्रेडिट निर्धारित किया गया है।
निर्धारित क्रेडिट प्राप्त करने पर ही सर्टिफिकेट, डिप्लोमा, डिग्री के प्रमाणपत्र दिए जाएंगे। उदाहरण के तौर पर स्नातक डिग्री पाने के लिए तीन वर्षों के क्रेडिट को मिलाकर 132 क्रेडिट प्राप्त करना जरूरी है। चार वर्षों की पढ़ाई करने पर 184 क्रेडिट हो जाएंगे। इसके आधार पर छात्र-छात्राओं को बैचलर रिसर्च इन फैकल्टी की डिग्री दी जानी है। परीक्षा के प्राप्तांक या ग्रेड का असर क्रेडिट पर नहीं पड़ेगा। निर्धारित घंटे पढ़ने पर 40 फीसदी वाले और 80 फीसदी अंक पाने वाले को समान क्रेडिट ही प्राप्त होगा।
आगरा। विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी प्रो. प्रदीप श्रीधर ने बताया कि दो तरह के रोजगारपरक पाठ्यक्रम तैयार किए गए हैं। पहला- एक सेमेस्टर में पूर्ण होने वाले और दूसरा वह है जिसमें, एक ही पाठ्यक्रम जिसकी विशेषज्ञता प्रत्येक सेमेस्टर के साथ बढ़ती जाएगी, पर किसी भी सेमेस्टर में छोड़ने पर वह पूरा हो सकेगा।