फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

UP: जंजीरों में कैद कर ‘हरि’ से मंगवाई भीख...शरीर पर ऐसे घाव, चुरमुरा पहुंच मिली आजादी

Sun, 27 Jul 2025 04:02 PM IST
अरुन पाराशर संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा

सार

हाथी के कथित मालिक वैध दस्तावेज पेश नहीं कर पाए, तो वन विभाग की टीम ने हरि को वाइल्ड लाइफ एसओएस को सौंप दिया। हरि को 600 किमी दूर मथुरा के चुरमुरा अस्पताल में भेजा गया है। 
विज्ञापन
हाथी। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

अयोध्या की सड़कों पर जंजीरों में कैद कर नर हाथी हरि का इस्तेमाल भीख मंगवाने के लिए किया जा रहा था। वन विभाग ने अयोध्या में कार्रवाई की तो हाथी को मुक्त करा लिया गया। अयोध्या और सुल्तानपुर वन विभाग ने रेस्क्यू कर वाइल्ड लाइफ एसओएस के चुरमुरा स्थित हाथी अस्पताल भेजा है, जहां हरि की चिकित्सा देखभाल और पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू की गई है।
विज्ञापन


अयोध्या में नर हाथी हरि को भिक्षा मांगने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था। हाथी के कथित मालिक वैध दस्तावेज पेश नहीं कर पाए, तो वन विभाग की टीम ने हरि को वाइल्ड लाइफ एसओएस को सौंप दिया। हरि को 600 किमी दूर मथुरा के चुरमुरा अस्पताल में भेजा गया है। 

जब हाथी की जांच की गई तो उसके शरीर पर अंकुश (बुलहुक) के घाव, पीछे की टांगों पर लोहे की जंजीरों से पड़े घाव और हड्डियों की विकृतियां पाई गईं। अस्पताल में हरि को 24 घंटे निगरानी में रखा जा रहा है। यहां हरि ने रोटी, केला, लौकी, कटहल और गुड़ को भोजन में पसंद किया।
विज्ञापन


हाथी का कष्ट देखकर निकले आंसू
अयोध्या से चुरमुरा लाए गए हाथी के सिर और पैर में घाव और उससे हो रहे कष्ट देखकर अस्पताल में काम करने वाले कर्मचारियों की आंखों से आंसू निकल आए। अस्पताल के वरिष्ठ पशुचिकित्साधिकारी डॉ. प्रमोद राजपूत ने बताया कि अस्पताल में आने के बाद प्राथमिक चिकित्सा की गई है। हरि को लंबे समय तक उपचार की जरूरत है। 

हरि को आजाद कराने में सहयोग देने वाले पर्यावरण मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा कि भीख मांगने में हाथी के इस्तेमाल करने की अमानवीय परंपरा को जड़ से खत्म करना होगा। वाइल्ड लाइफ एसओएस के सीईओ कार्तिक सत्यनारायण ने कहा कि हरि का रेस्क्यू एक हाथी की कहानी नहीं है, बल्कि अनगिनत हाथियों की पीड़ा है, जो शादी में, सड़कों पर और मंदिरों में प्रदर्शन के लिए इस्तेमाल किए जा रहे हैं। यह क्रूर प्रथा रुकनी चाहिए।
विज्ञापन

 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें