52 वर्षीय वायु को लकड़ी ढोने वाले हाथी के रूप में इस्तेमाल किया जाता था। एक बार नागालैंड में गिर गया, जिसके कारण उसका बायां पैर बुरी तरह से टूट गया। इलाज नहीं मिलने के कारण हाथी दुबला-पतला और कुपोषित हो गया। उसकी कोहनी के जोड़ में एंकिलोसिस (जोड़ों की अकड़न) और ऑस्टियोआर्थराइटिस के कारण उसे चलने में परेशानी होती थी। वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक और सीईओ, कार्तिक सत्यनारायण ने बताया कि वायु के शरीर में खून की कमी थी और वह संक्रमण का भी शिकार था।
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अनुमति मिलने के बाद, मथुरा में वाइल्डलाइफ एसओएस एलिफेंट हॉस्पिटल की एक विशेषज्ञ टीम विशेष रूप से सुसज्जित एलिफेंट एम्बुलेंस के साथ रवाना हुई। सह-संस्थापक और सचिव, गीता शेषमणि ने बताया कि रेस्क्यू ऑपरेशन से पहले, हम सुनिश्चित करते हैं कि जानवर तनाव में न हो। हमने उसके लिए पानी से लेकर पोषण और दवाओं तक सभी जरूरी व्यवस्थाएं की। यात्रा के दौरान वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. ई. गोचलन ने उसे यात्रा के दौरान सहज महसूस कराने के लिए सभी जरूरी इंतजाम किए। डायरेक्टर कंजरवेशन प्रोजेक्ट्स बैजूराज एमवी ने कहा कि अब जबकि वायु अस्पताल पहुंच चुका है तो हम उम्मीद करते हैं कि वह शीध्र ही स्वास्थ्य लाभ प्राप्त करने लगेगा।
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