हर साल 22 सितंबर को हाथी प्रशंसा दिवस मनाया जाता है। बैगिंग एलीफेंट अभियान हाथियों को शहरी सड़कों, मंदिर अनुष्ठानों और शादी समारोहों से बचाता है, जहां उनसे भीख मंगवाई जाती है।
हाथी यानि प्रकृति की वो अद्भुत रचना जो विशालकाय होते हुए भी खूंखार नहीं और जो ताकतवर होते हुए भी सौम्यता का प्रतीक है। हर साल 22 सितंबर को हाथी प्रशंसा दिवस मनाया जाता है। वाइल्डलाइफ एसओएस के हाथी अस्पताल एवं रेस्क्यू सेंटर के माध्यम से अब तक 130 हाथियों को बचाया जा चुका है। संगठन बेगिंग एलीफेंट कैंपेन के जरिए हाथियों पर होने वाले अत्याचार के खिलाफ राष्ट्रव्यापी अभियान चला रहा है।
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हाथी भारत की सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक होने के साथ पारिस्थितिकी तंत्र के आधार स्तंभ हैं। वह जंगलों को खोलते हैं, जिससे सूर्य का प्रकाश छोटे पौधों तक पहुंचता है। वाइल्डलाइफ एसओएस के सीईओ और सह-संस्थापक, कार्तिक सत्यनारायण बताते हैं कि गोबर के माध्यम से बड़े, कार्बन-भंडारित पेड़ों के बीज बिखेरते हैं, मिट्टी को समृद्ध बनाते हैं।
एनजीओ की सह-संस्थापक और सचिव गीता शेषमणि बताती हैं कि बैगिंग एलीफेंट अभियान हाथियों को शहरी सड़कों, मंदिर अनुष्ठानों और शादी समारोहों से बचाता है, जहां उनसे भीख मंगवाई जाती है। ये हाथी वाइल्डलाइफ एसओएस हाथी संरक्षण एवं देखभाल केंद्र और मथुरा स्थित अस्पताल में चिकित्सा देखभाल, पुनर्वास केंद्र में शांति से रह रहे हैं।
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डायरेक्टर कंजरवेशन प्रोजेक्ट्स, बैजूराज एमवी बताते हैं कि बैगिंग एलीफेंट कैंपेन ने मनु और हरि जैसे हाथियों को बचाया है, जो पूर्ण रूप से दृष्टिहीन, दीर्घकालिक घावों से पीड़ित और गंभीर जोड़ों की विकृति से पीड़ित हैं।