30 साल पहले बहुजन समाज पार्टी ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की जंग लड़ना शुरू की। तब से लेकर अब तक बसपा के लिए उत्तर (पूर्व में आगरा ईस्ट) विधानसभा सीट का चक्रव्यूह अभेद रहा है। पार्टी ने यहां वैश्य, ब्राह्मण, पंजाबी, कुशवाह और मुस्लिम प्रत्याशी भी उतारा, लेकिन एक बार भी इस विधानसभा सीट पर नहीं जीत सकी। पिछले तीन चुनाव से बसपा प्रत्याशी दूसरे नंबर पर तो है, लेकिन विधायक बनने का ख्वाब टूटता रहा है।
बसपा पार्टी नीति के तहत अपना प्रत्याशी उत्तर विधानसभा सीट उपचुनाव में नहीं उतार रही है, लेकिन आम चुनाव में भी उसके प्रत्याशियों को कभी जीत का स्वाद नहीं मिल सका। बसपा ने पहला चुनाव 1989 में लड़ा, तब 3 फीसदी वोट हासिल किए, लेकिन उसके बाद 2002 में पार्टी पहली बार 16 फीसदी वोट हासिल कर पाई। बीते चुनाव में पार्टी 21 फीसदी वोट लेकर दूसरे नंबर पर जरूर रही, लेकिन भाजपा प्रत्याशी जगन प्रसाद गर्ग से हार का अंतर 86,320 वोट हो गया।
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अतुल गर्ग फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
उत्तर विधानसभा पर बसपा का प्रदर्शन
चुनाव
प्रत्याशी
वोट
प्रतिशत
1989
कल्लू अंसारी
2170
3.06 %
1991
शांति स्वरूप कुशवाह
1518
1.89 %
1993
रवि प्रकाश जिंदल
15708
16.70 %
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Sunil Chittor
(सपा-बसपा गठबंधन में तब सपा प्रत्याशी चुनाव लड़े)
1996 प्रत्याशी नहीं उतारा
2002 सुशील गोयल 12,904 16.25% चौथा
2007 सर्वप्रकाश कपूर 22,937 दूसरा
2012 राजेश अग्रवाल 45,045 22.90 % दूसरा
2017 ज्ञानेंद्र गौतम 48,800 21.26 % दूसरा
बसपा आगरा-अलीगढ़-बरेली सेक्टर प्रभारी सुनील चित्तौड़ का कहना है कि आगरा उत्तर विधानसभा सीट पर हमारा वोट प्रतिशत बढ़ रहा है। तीन चुनाव से बसपा प्रत्याशी दूसरे नंबर पर है। उपचुनाव में सपा अपना प्रत्याशी उतारेगी। सपा से गठबंधन के कारण बसपा का सहयोग रहेगा।
बसपा और सपा के बीच 1993 में गठबंधन हुआ, जिसमें आगरा पूर्व (अब उत्तर) विधानसभा सीट पर सपा प्रत्याशी के रूप में रवि प्रकाश जिंदल चुनाव लड़े, लेकिन उन्हें महज 15,708 वोट ही हासिल हुए। वह तीसरे नंबर पर रहे, जबकि भाजपा प्रत्याशी सत्य प्रकाश विकल 48,055 वोट पाकर जीते।गठबंधन प्रत्याशी रवि प्रकाश जिंदल को महज 16.70 फीसदी वोट ही मिले, जबकि भाजपा प्रत्याशी को 51.10 फीसदी और दूसरे नंबर पर रहे कांग्रेस प्रत्याशी ओम प्रकाश जिंदल को 25.84 फीसदी वोट मिले थे। सपा, बसपा गठबंधन और कांग्रेस प्रत्याशी के वोट मिलाकर भी भाजपा से कम रहे।