हेलो...मैं एटीएस से बोल रहा हूं। पुलवामा हमले का एक आतंकी गिरफ्तार हुआ है। उसके पास मिले एटीएम से 536 करोड़ का लेन-देन हुआ है। यह एटीएम आपके आधार से लिंक है....। इसके बाद धमकी देकर साइबर अपराधियों ने रिटायर्ड राज्यकर्मी को तीन दिन डिजिटल अरेस्ट कर 12 लाख रुपये खाते में ट्रांसफर करवा लिए। इसके बाद भी गिरफ्तारी की धमकी मिलने पर पीड़ित ने थाना साइबर क्राइम में प्राथमिकी दर्ज कराई है।
सदर के बुंदु कटरा निवासी 68 वर्षीय विनोद वीर सिंह रिटायर्ड राज्यकर्मी हैं। उन्होंने पुलिस को बताया कि 17 फरवरी को उनके पास अनजान नंबर से कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को एटीएस अधिकारी बताया। पुलवामा हमले के आतंकी को पकड़ने पर उसके पास मिला एटीएम उनके आधार कार्ड से लिंक बताया। लेन-देन की जानकारी देकर उन्हें गिरफ्तार करने की बात की।
बयान दर्ज कराने के लिए उन्हें पुणे आने के लिए कहा गया। उम्र और बीमारी का हवाला देने पर आरोपी ने ऑनलाइन सुनवाई की व्यवस्था का हवाला दिया। बातचीत के दौरान परिवार, बच्चों और बैंक खातों की जानकारी ली। अधिकारियों से बात कर मदद का भरोसा दिलाया। इस दौरान किसी को कॉल करने या किसी का कॉल रिसीव करने से मना किया। इसी दौरान एक कॉल और आई। कॉल करने वाले ने खुद को प्रदीप सामंत बताते हुए फोन सर्विलांस पर लगने की जानकारी दी। दिल्ली के कथित अधिकारी से ऑनलाइन काउंसलिंग कराई। मामला लीक होने पर आतंकियों का डर दिखाया।
इस तरह तीन दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखकर प्रदीप सामंत ने रिपोर्ट अच्छी आने की बोलकर उन्हें गलत फंसाए जाने की बात कही। इसके बाद राजेश मिश्रा नाम से वीडियो कॉल आई। कहा गया कि जैसा कहा जाए बस उतना ही करना। 22 फरवरी को आरोपी ने कॉल कर कहा कि अगले दिन सुबह कॉल कर अपने नजदीकी एसबीआई बैंक जाना और कॉल करना। अगले दिन आरोपियों ने पासबुक, चेकबुक और आधार लेकर बैंक जाने को कहा। वहां पहुंचने पर एक खाते में 12 लाख रुपये जमा करने को कहा। मना करने पर तुरंत अरेस्ट करने की धमकी दी। उन्होंने रुपये बताए खाते में भेज दिए।
इसके बाद भी आरोपी लगातार कॉल कर धमकाते रहे, तब उन्होंने थाना साइबर क्राइम में सूचना दी। डीसीपी साइबर क्राइम आदित्य कुमार ने बताया कि प्राथमिकी दर्ज कर मोबाइल नंबर और बैंक खाते की जानकारी की जा रही है।आरोपियों का पता लगाया जा रहा है।
कोई सुरक्षा एजेंसी नहीं करती डिजिटल अरेस्ट
डीसीपी ने बताया कि साइबर अपराधी खुद को पुलिस, एटीएस, सीबीआई या एनसीआरबी अधिकारी बताकर डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाते हैं। कोई भी जांच एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी, पूछताछ या धन ट्रांसफर नहीं कराती। आधार, बैंक विवरण, ओटीपी या निजी जानकारी कभी साझा न करें। अज्ञात लिंक, स्क्रीन शेयरिंग या रिमोट एप इंस्टॉल न करें। ऐसे कॉल पर तुरंत फोन काटें और 1930 हेल्पलाइन या साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें। अपने परिवार, विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों को जागरूक करें कि कानूनी कार्रवाई केवल वैधानिक नोटिस और प्रत्यक्ष प्रक्रिया से होती है।