भाई को ढूंढने गया था, वहीं बैठा लिया
विकास का दावा है 24 फरवरी 2012 को उसके भाई सोम को चाइल्डलाइन ने बाल कल्याण में पेश किया था। उस समय सोम को ढूंढ़ते हुए मैं उसे लेने वहां पहुंचा तो, राजकीय बाल शिशु गृह में मुझे भी बैठा लिया गया। विकास बताता है कि चाइल्ड लाइन ने भिक्षा मांगते हुए पकड़ा था। जबकि उसकी उम्र इतनी छोटी थी कि वो भीख नहीं मांग सकता था।
अपने भाई से मिलने आता रहा है विकास : नरेश पारस
विकास की लड़ाई लड़ रहे समाजसेवी नरेश पारस बताते हैं कि चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (सीडब्ल्यूसी)की बैठक में सोम भी यह कह चुका है कि विकास उसका भाई है। इसके साथ ही समय-समय पर बंगलूरू से आकर राजकीय बाल शिशु गृह में भी विकास अपने भाई सोम से मिलता रहा है। पारस का कहना है कि कई बार विकास ने विभागों को भी पत्र लिखे। इसके बाद भी कोई सुनवाई नहीं हुई। अदालत के फैसले के बाद उसे लगा कि अब उसका पक्ष भी अदालत सुनेगी।