गणेश चतुर्थी के पर्व पर पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने वाली गोमय गणेश प्रतिमाएं उपलब्ध होंगी। गाय के गोबर से तैयार इन गणेश प्रतिमाओं की बिक्री के लिए नगर निगम कार्यालय में स्टॉल लगाया गया है। यहां 9 से 18 इंच तक के गणपति उपलब्ध कराए गए हैं।
पशु कल्याण अधिकारी डॉ. अजय कुमार सिंह ने बताया कि प्लास्टर ऑफ पेरिस की जगह लोग इन गाय के गोबर से बनीं प्रतिमाएं खरीद सकते हैं। निगम के गेट पर ही गौमय उत्पाद केंद्र स्थापित कराया गया है। लव यू जिंदगी फाउंडेशन की ओर से इन्हें तैयार कराया गया है। इनके विसर्जन के लिए श्रद्धालुओं को नदी या अन्य जल स्रोतों तक जाने की आवश्यकता नहीं होगी। इनका विसर्जन घर में ही गमले, बाल्टी या किसी अन्य पात्र में पानी डालकर किया जा सकता है। प्रतिमा के घुलने के बाद प्राप्त सामग्री को पौधों और पेड़-पौधों के लिए खाद के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
संचालक प्रांकुर जैन के अनुसार नगर निगम कार्यालय में लगाए गए स्टॉल पर शनिवार को दोपहर 12 बजे से शाम चार बजे और रविवार को 12 बजे से शाम 6 बजे तक गोमय गणेश प्रतिमाओं की बिक्री की जाएगी। श्रद्धालु अपनी आवश्यकता और पूजा स्थल के अनुसार अलग-अलग आकार की प्रतिमाएं खरीद सकते हैं। इनकी कीमत 300 से 1800 रुपये तक है। नगर आयुक्त संतोष कुमार वैश्य ने बताया कि पीओपी की जगह लोग गाय के गोबर से बनीं प्रतिमाओं को प्राथमिकता दें। इससे पर्यावरण संरक्षण तो होगा ही, गोमय उत्पादों को भी बढ़ावा मिलेगा।
बाजारों में छाई राैनक, मिट्टी के गणपति बने पहली पसंद
गणेश चतुर्थी का त्योहार नजदीक आते ही शहर के प्रमुख बाजारों में खासी रौनक देखने को मिल रही है। बाजार गणपति बप्पा की आकर्षक प्रतिमाओं से सज चुके हैं। इस बार बाजारों में पारंपरिक प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) की तुलना में मिट्टी से बनी मूर्तियों की मांग ज्यादा है।
खंदारी क्षेत्र में हर साल गणेश प्रतिमाओं की दुकान लगाने वाले दुकानदार अनुज ने बताया कि इस बार ग्राहकों का रुझान पर्यावरण संरक्षण की ओर अधिक है। उन्होंने बताया, दुकान पर 120 रुपये से लेकर 1000 रुपये तक की प्रतिमाएं उपलब्ध हैं। हालांकि दुकान में पीतल और पीओपी की मूर्तियां भी रखी गई हैं, लेकिन लोग मिट्टी की मूर्तियों की ही खरीदारी कर रहे हैं।
- मिट्टी की मूर्तियों की मांग ज्यादा है क्योंकि घर पर ही पानी में इनका विसर्जन बहुत आसानी से हो जाता है। विसर्जन के बाद बची मिट्टी का उपयोग गमले में पौधे लगाने के लिए किया जा सकता है।
गीता बंसल, खंदारी
-मिट्टी की मूर्तियां पानी में जल्दी घुल जाती हैं, जिससे जल प्रदूषण नहीं होता। यही कारण है कि इस बार हर घर में मिट्टी के गणेश जी स्थापित करने को प्राथमिकता दी जा रही है।
स्वाति भंडारी, फैड्स आशियाना