नेपाल में आए विनाशकारी भूकंप ने नेपाल की जमीं पर कई धरोहरों को जमींदोज कर दिया। इस भूकंप में दुनिया के सातवें अजूबे ताजमहल को बेशक भारी नुकसान न हुआ, लेकिन पूर्व में आए जलजलाें ने ताजमहल को हिलाकर रख दिया था। तब ताज की मस्जिद और मीनारों में दरारें आ गई थीं। इनमें चांदी को पिघलाकर भरा गया था। मस्जिद में कई साल तक मरम्मत का भी काम चला।
रिक्टर पैमाने पर 8.3 मैग्नीट्यूड का भूकंप ताजमहल पर 15 जनवरी 1934 में आया। तब भूकंप का केंद्र बिहार-नेपाल बार्डर पर था, लेकिन उसके झटकों ने ताजमहल की मस्जिद को भारी नुकसान पहुंचाया। आर्किलॉजिकल सर्वे आफ इंडिया की 1935-36 की रिपोर्ट में यूनाइटेड प्राविंस के आगरा, इलाहाबाद, बनारस, जौनपुर, लखनऊ में स्मारकों को भूकंप से हुए नुकसान का ब्योरा दिया गया है। 1935 में भूकंप के बाद ताजमहल मस्जिद की मरम्मत के लिए 17,186 रुपये का एस्टीमेट बनाया गया, लेकिन जब काम शुरू हुआ तो यह बेहद कम पड़ गया। नुकसान इससे कहीं ज्यादा था, जिसे सुधारने में पूरी लागत करीब 26,951 रुपये आई। तब सोने का भाव 35 रुपये प्रति तोला था, जबकि अब लगभग 31 हजार रुपये प्रति तोला। मस्जिद के लाल पत्थर टूट कर निकल गए थे, जिन्हें बदला गया। कई जगह दरारें भी थीं।
संगमरमरी मीनारों में आई थीं दरारें
आगरा। 1803 के भूकंप में ताजमहल के एक हिस्से को नुकसान पहुंचा। मीनारों में दरारें देखी गईं। एएसआई के निदेशक डा. डी दयालन की पुस्तक में बिशन कपूर की पुस्तक ‘ग्लिम्प्सेज आफ आगरा’ के हवाले से बताया है कि खादिमों ने इस बात की जानकारी दी थी कि मीनारों की दरारों में गर्म पिघलती चांदी भरवाई गई। यही नहीं, कब्र वाले कक्ष में फर्श में दरारें पड़ गई थीं।
1924 में दक्षिण पश्चिमी हिस्से की मरम्मत
आगरा। एएसआई की 1925-26 की रिपोर्ट के मुताबिक, ताजमहल मस्जिद के दक्षिणी-पश्चिमी हिस्से को भूकंप में नुकसान हुआ था। तब दक्षिणी दीवार, आर्च और सामने के पत्थरों में दरारें पड़ गई थीं, जबकि कुछ टूट गए थे। आर्च की दरारों को 1924 में दुरुस्त किया गया, जबकि कई पत्थरों को बदला गया।
1719 में दिल्ली में नुकसान, आगरा का रिकार्ड नहीं
आगरा। इलाहाबाद की गवर्नमेंट लाइब्रेरी में रखी मो. अली खां अंसारी की पुस्तक तारीख ए मुजफ्फरी में 1719 में आए भूकंप में दिल्ली के भूकंप का ब्योरा है। जहां किले की दीवारें ध्वस्त हो गईं और दिल्ली किले को नुकसान पहुंचा। इसमें आगरा का रिकार्ड नहीं है।