फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बिगड़ रही धरती की ‘सेहत’

Fri, 22 Apr 2016 02:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन
धरती - फोटो : amar ujala
विज्ञापन
ताजमहल को प्रदूषण से बचाने के लिए 1998 में ताज ट्रिपेजियम जोन (टीटीजेड) की घोषणा कर प्रदूषणकारी उद्योगों का संचालन पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया लेकिन शहर की आबोहवा पर कोई खास असर नहीं हुआ। अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि दो साल में ताजमहल पर ही ढाई गुना से ज्यादा प्रदूषण बढ़ गया।
विज्ञापन

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार 31 मार्च 2015 को ताज पर रेसपिरेटरी सस्पेंडेंड पर्टिकुलेट मेटर (आरएसपीएम) जहां 98 माइक्रोग्राम प्रतिघन मीटर था वहीं, इस साल इसी तारीख में यह बढ़कर 260 माइक्रोग्राम प्रतिघन मीटर हो गया। इसी तरह से पिछले साल 31 मार्च को ही सस्पेंडेड पर्टिकुलट मेटर (एसपीएम) जहां 136 था, जो बढ़कर 391 माइक्रोग्राम प्रतिघन मीटर हो गया। धरती की खूबसूरती पर आरी चलाने का ही नतीजा है कि यमुना नदी वर्तमान में अपने निम्नतम स्तर 480 फुट पर बह रही है।
इसमें पानी कम और सिल्ट ज्यादा है। कम होती हरियाली की वजह से मानसून भी इस जिले से रूठ सा गया है। स्थिति यह है कि धरती कोख भी सूखती जा रही है। जिले के 15 में से 11 ब्लॉक पहले डार्क जोन घोषित किए जा चुके हैं।
विज्ञापन


बंजर हो रही जमीन
मिट्टी के लिए जरूरी 17 तत्वों में से सबसे महत्वपूर्ण आर्गेनिक कार्बन है। 90 प्रतिशत मिट्टी में इसकी कमी हो चुकी है।  नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश, जिंक, मैग्नीज, बोरान की मात्रा भी संतुलित नहीं है।

गिर रहा भूगर्भ जलस्तर
भूमिगत पानी का स्तर गिरता जा रहा है। शहर में जहां 10 साल पहले सौ फीट गहराई पर पानी निकल आता था, अब ढाई सौ फुट पर हैंडपंप या सबमर्सिबल की बोरिंग हो रही है।

सांस रोग का खतरा बढ़ा
आगरा। एसएन मेडिकल कालेज में क्षय एवं वक्ष रोग विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक एवं पर्यावरणविद् डा. जीवी सिंह बताते हैं यहां हर रोज सांस के करीब 20-28 नए मरीज आ रहे हैं। इसमें कामकाजी पुरुष और मजदूरों की संख्या अधिक है।

धरती के मुसीबत बन रहा कचरा
शहर की धरती के लिए सबसे बड़ी मुसीबत कचरा बना हुआ है। कूड़े का निस्तारण न हो पाने की वजह से जंगल की जमीन और नदी किनारे कूड़े के ढेर लगते जा रहे हैं। यह मिट्ी को दूषित कर रहा है। लापरवाही का आलम यह है कि मेडिकल और ई वेस्ट को भी इसी में डाला जा रहा है। इधर, तमाम प्रयासों के बावजूद धरती के सबसे नुकसानदेह पॉलिथीन पर अब तक पूरी तरह से प्रतिबंध नहीं लग पाया है।

लोगों को अभी अंदाजा नहीं है कि उनकी आने वाली पीढ़ियों को कितने भयानक परिणाम भुगतने होंगे? नदियों किनारे और जंगलों की जमीन पर कंकरीट का जाल बिछाया जा रहा है। कूड़े का निस्तारण न होने की वजह से एक जगह एकत्रित होने वाले कूड़े से कई किमी के क्षेत्र में मिट्टी दूषित हो रही है।
- डीके जोशी, पर्यावरणविद

डाक्टरों ने दिया एक सिर पांच पौधे का संदेश
आगरा डाक्टर साइकिल एसोसिएशन पौधे लगाकर हरियाली बढ़ाने की मुहिम चला रहे हैं। हर सदस्य को पांच पौधे लगाने और उसे बचाने का संकल्प ले रहे हैं। साथ ही दैनिक कार्यों में साइकिल का इस्तेमाल पर भी जोर दे रहे हैं। एसोसिएशन सचिव डा. राजकुमार गुप्ता ने बताया कि एक सिर पांच पौधे के लिए अपने मरीजों को भी जागरूक कर रहे हैं। 
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें