वह रविवार को दीवानी स्थित बार एसोसिएशन के सभागार में विभिन्न बार एसोसिएशन की संयुक्त बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जस्टिस जसवंत सिंह आयोग की रिपोर्ट में आगरा को खंडपीठ स्थापना के लिए उचित स्थान माना गया था। इसके बावजूद खंडपीठ स्थापित नहीं हो सकी है।
बैठक में केंद्रीय कानून एवं न्याय राज्यमंत्री अर्जुन राम मेघवाल के खंडपीठ स्थापना की सूची में सबसे ऊपर मेरठ होने के बयान का विरोध किया गया। अधिवक्ताओं ने खंडपीठ स्थापना के लिए प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और कानून मंत्री से मिलने का प्रस्ताव रखा।
साथ ही अपनी मांगों को पूरा कराने के लिए आगरा मंडल के सभी जिले के बंद के आह्वान का प्रस्ताव रखा। इस विषय में अगली बैठक 13 जून को रखने की बात कही। इस दाैरान सुभाष बाबू परमार, गिरीश पाठक, राजीव सोनी, आरके नीलम, नरेंद्र पाल सिंह, महताब सिंह, बृजराज सिंह परमार,सर्वेश कुलश्रेष्ठ, देवेंद्र सिंह धाकरे आदि अधिवक्ता माैजूद रहे।
जनमंच ने भी जताया आक्राेश
पश्चिमी उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण जनमंच के पदाधिकारियों ने केंद्रीय मंत्री के खंडपीठ की दाैड़ में सबसे आगे मेरठ होने के बयान का विरोध किया। दीवानी के गेट नंबर दो पर प्रदर्शन किया। जनमंच के अध्यक्ष चौधरी अजय सिंह ने कहा कि खंडपीठ आगरा अधिकार है। अधिवक्ता इसे लेकर ही रहेंगे। इस दौरान पवन गुप्ता, प्रदेश कुमार यादव, सतीश, चौधरी हरदयाल सिंह, शिव कुमार सैनी, सुरेंद्र कुमार आदि मौजूद रहे।