कई शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि ऑनलाइन शिकायतें बंद कर दी गईं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। छावनी परिषद के सीईओ ने मामले की जांच कराकर वास्तविक निस्तारण सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया है।
आगरा छावनी परिषद की ऑनलाइन शिकायत निस्तारण व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि मौके पर समाधान किए बिना ही ई-छावनी पोर्टल पर वर्क अंडर प्रोसेस या शिकायत का निस्तारण दर्ज कर शिकायतें बंद की जा रही हैं, जबकि पानी आपूर्ति और पाइपलाइन लीकेज जैसी समस्याएं बरकरार हैं। वहीं छावनी परिषद के सीईओ दीपक मोहन ने कहा कि ऐसे मामलों की जांच कराकर वास्तविक निस्तारण न होने के कारणों का पता लगाया जाएगा और संबंधित समस्याओं का समाधान कराया जाएगा।
केस नं 1
नई बस्ती पथवारी, बालूगंज निवासी सुरेखा सिंह ने बताया कि 11 जून को गली में पानी की आपूर्ति न होने की शिकायत ऑनलाइन दर्ज कराई थी। उसी दिन बिना जांच के शिकायत का समाधान दिखा दिया गया। दोबारा शिकायत करने पर भी कंप्लेन अंडर प्रोसेस लिख दिया गया, लेकिन आज तक न पानी की सप्लाई शुरू हुई और न कोई कर्मचारी मौके पर पहुंचा।
केस नं 2
वार्ड-7 कृष्णा नगर निवासी अरुण गुप्ता ने दो स्थानों पर पाइपलाइन लीकेज की शिकायत ऑनलाइन की थी। पोर्टल पर शिकायत का निस्तारण दिखा दिया गया, जबकि लीकेज आज भी बरकरार है और सड़क पर पानी बह रहा है। छावनी परिषद कार्यालय में जानकारी देने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई।
केस नं 3
चार रहट, बालूगंज निवासी परमजीत सिंह ने बताया कि पानी की लीकेज की शिकायत पर न तो निरीक्षण हुआ और न मरम्मत। पहली, दूसरी और तीसरी बार शिकायत करने पर हर बार पोर्टल पर वर्क अंडर प्रोसेस या समाधान दर्ज कर शिकायत बंद कर दी गई, जबकि दो स्थानों पर लीकेज अब भी बनी हुई है।