विजयदशमी पर्व पर शमी वृक्ष की पूजा और नीलकंठ पक्षी के दर्शन करने से सभी कार्य शुभफलदायी होते हैं। इस बार विजयदशमी का श्रवण नक्षत्र में होना अति शुभकारक है। पौराणिक कथाओं के अनुसार दशहरा के दिन ही भगवान राम ने लंका के राजा रावण पर विजय प्राप्त की थी।
मथुरा के दीपक ज्योति भागवत संस्थान के ज्योतिषाचार्य आचार्य कामेश्वर चतुर्वेदी ने बताया कि आश्विन मास शुक्ल पक्ष दशमी तिथि में अपराजिता देवी तथा शमी वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व है। त्रेता युग में भगवान श्रीराम ने भी अपराजिता देवी एवं शमी वृक्ष की पूजा की थी, जिसके चलते रावण के ऊपर विजय प्राप्त हुई।
उन्होंने बताया कि इस बार दशहरा के दिन पंचक नहीं है। धर्म सिंधु आदि ग्रंथों के अनुसार विजय दशमी पर श्रवण नक्षत्र का होना श्रेष्ठ माना गया है। श्रवण नक्षत्र राष्ट्र के लिए शुभ होता है।