टूंडला (फिरोजाबाद)। प्रदेश सरकार द्वारा रामलीला मंचन के लिए सौ दर्शकों के साथ छूट दिए जाने व आदि शक्ति मां दुर्गा की पूजा के लिए पंडाल पर रोक पर भक्तों ने इसे आस्था पर चोट बताया है। खासकर टूंडला में दुर्गा पूजा महोत्सव को बड़ी श्रद्धाभाव के साथ मनाई जाती है। लोगों ने कहा कि रामलीला मंचन की तरह सोशल डिस्टेंस पर दुर्गा महोत्सव की भी छूट मिलनी चाहिए।
जिस प्रकार से रामलीला का मंचन सीमित दर्शकों के साथ किया जा सकता है। उसी प्रकार मां दुर्गा की पूजा-अर्चना भी पांडाल में सोशल डिस्टेंस के साथ पुलिस की निगरानी में कराई जा सकती है। इसे रोकना आस्था पर चोट करने के बराबर है।
नीता श्रोतिया-समाज सेविका
मां दुर्गा की पूजा का बहुत महत्व माना जाता है। आदिशक्ति की पूजा सभी भक्त पूरी आस्था के साथ करते हैं। महिला श्रद्धालुओं के लिए मां की पूजा का विशेष महत्व है। इस पर रोक लगाया जाना उचित नहीं है। इससे श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंची है।
पूनम यादव, महिला श्रद्धालु
सरकार का यह निर्णय भक्तों की आस्था के साथ खिलवाड़ जैसा है। यदि रामलीला में सौ दर्शक जुट सकते हैं। पांडाल में सजी माता की प्रतिमाओं के दर्शन के लिए भी व्यवस्था हो सकती है। सरकार को अपने निर्णय पर पुन: विचार करना चाहिए।
आकाश गुप्ता, सदस्य दुर्गापूजा महोत्सव
टूंडला में कोलकाता के बाद मां दुर्गा पूजा महोत्सव का दूसरा नंबर आता है। माता के भक्तों के लिए सरकार का यह निर्णय निराशा भरा है। सरकार पांडाल में भी पुलिस प्रशासन की व्यवस्था के साथ सोशल डिस्टेंस के साथ दर्शनों की व्यवस्था कर सकती है। सरकार इस पर ध्यान दे।
रूपल, महिला श्रद्धालु