मैनपुरी। जिले में अवैध एक्सरे सेंटरों का कारोबार बेरोकटोक फल-फूल रहा है। स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार जहां जिले में केवल तीन एक्सरे सेंटर पंजीकृत हैं, वहीं 100 से ज़्यादा अवैध सेंटर खुलेआम संचालित हो रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि ज़िम्मेदार अधिकारियों के आवासों से महज़ 500 मीटर की दूरी पर भी ये अवैध सेंटर चल रहे हैं।
यह अवैध कारोबार इस कदर फैल चुका है कि हर गली-मोहल्ले में एक्सरे सेंटर खुल गए हैं। अकेले मैनपुरी शहर में ही 50 से अधिक सेंटर संचालित हो रहे हैं, जिनमें से 25 से 30 तो सीएमओ कार्यालय और जिला अस्पताल के बिल्कुल पास में बिना पंजीकरण के चल रहे हैं। सीएमओ कार्यालय के रिकॉर्ड के मुताबिक, मैनपुरी शहर में दो और कुसमरा में एक एक्सरे सेंटर पंजीकृत है, जबकि जिले में इसके अलावा कोई अन्य पंजीकृत सेंटर नहीं है। सूत्रों के अनुसार, यह संख्या वास्तविक से कहीं अधिक है, लेकिन न तो ज़िला प्रशासन और न ही स्वास्थ्य विभाग इस पर कोई ध्यान दे रहा है।
शासनादेश के अनुसार, केवल प्रशिक्षित एक्सरे तकनीशियन ही एक्सरे कर सकते हैं। लेकिन जिले में चल रहे इन अवैध सेंटरों पर बिना डिग्री और डिप्लोमा वाले लोग खुलेआम एक्सरे कर रहे हैं। इससे भी ज़्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि एक्सरे रिपोर्ट देने के लिए एमबीबीएस डॉक्टर की ज़रूरत होती है, जबकि यहां हाईस्कूल फेल लोग ही रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं। इन सेंटरों पर लोगों से मनमाना पैसा भी वसूला जा रहा है, एक एक्सरे के लिए 300 से लेकर 700 रुपये तक लिए जा रहे हैं।
शहर में अवैध एक्सरे सेंटरों के पनपने के पीछे कहीं न कहीं स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही भी ज़िम्मेदार है। महाराजा तेज सिंह जिला अस्पताल में दो डिजिटल और एक सादा एक्सरे सेंटर संचालित हैं। सादा एक्सरे सेंटर पर तो फिल्म उपलब्ध है, लेकिन डिजिटल एक्सरे सेंटर पर फिल्म न होने के कारण मरीज़ों को सादे कागज़ पर ही एक्सरे रिपोर्ट दी जा रही है। ऐसे में मज़बूर लोगों को प्राइवेट और अवैध सेंटरों का रुख करना पड़ रहा है।