आगरा के झरना नाला बस हादसे में 29 लोगों की मौत के अगले दिन ही यमुना एक्सप्रेस वे पर रोडवेज के चालक ने शराब पीकर बस दौड़ा दी। एक्सप्रेस वे की पेट्रोलिंग टीम ने उसे पकड़ लिया, लेकिन पुलिस ने उसे छोड़ दिया।
सवारियों से भरी बस सादाबाद डिपो की थी। नोएडा से आगरा आ रही थी। मंगलवार शाम छह बजे मथुरा के बल्देव क्षेत्र में चालक ने बस को एक्सप्रेस वे के किनारे ले जाकर रोका था। यहां साइड फेसिंग कटी हुई थी।
इसे खेत में ढाबे चला रहे लोगों ने काट रखा था। इसी से सवारी और ड्राइवर ढाबे पर गए। यमुना एक्सप्रेसवे की पेट्रोलिंग टीम को इसका पता चला। वहां चालक से पूछताछ की तो उसने टीम के साथ बदसलूकी की।
नशे में मिला बस चालक
कॉरीडोर इंचार्ज मेजर (रिटायर्ड) मनीष कुमार सिंह ने बताया कि इसकी सूचना पर बस को खंदौली टोल प्लाजा पर रोक लिया गया। ब्रीथ एनेलाइजर से ड्राइवर का अल्कोहल टेस्ट कराया गया। वो नशे में मिला।
टोल प्लाजा पर बनी चौकी पर तैनात खंदौली पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने उससे पूछताछ की। उधर, पुलिस सूत्रों ने बताया कि उसे छोड़ दिया गया। न एफआईआर की गई, न चालान काटा गया। पुलिसकर्मी यह कहकर चले गए कि ड्राइवर ने वादा किया है कि भविष्य में शराब पीकर ड्राइविंग नहीं करेगा।
खंदौली थाना के इंस्पेक्टर कह रहे हैं कि बस में दूसरा ड्राइवर भी था लेकिन इसका जवाब नहीं दे रहे कि दारू पीकर बस चलाने वाले ड्राइवर को क्यों छोड़ दिया?
एसएचओ प्रशांत त्यागी ने बताया कि बस चालक के नशे में होने की सूचना पर पुलिस गई थी। पता चला कि बस में एक और चालक है। इस कारण कार्रवाई नहीं की। दूसरा चालक ही बस चलाकर ले गया।
खेतों में खुले ढाबे, एक्सप्रेस वे की फेसिंग तोड़ी
मथुरा क्षेत्र में एक्सप्रेस वे के किनारे खेतों में अवैध रूप से ढाबे खोल लिए गए हैं। ढाबा संचालक एक्सप्रेस वे किनारे की फेसिंग तोड़ रहे हैं। इससे रास्ता बन जाता है। बसों के चालक इसी रास्ते से बसों को ढाबों पर ले जा रहे हैं।
एक्सप्रेस वे कॉरीडोर के इंचार्ज मेजर ( रिटायर्ड ) मनीष कुमार सिंह का कहना है कि अभी तक फेसिंग तोड़े जाने के 125 मामले आ चुके हैं। इनकी तहरीर पुलिस को दी गई। एक में भी एफआईआर दर्ज नहीं की गई।
निलंबित किया जा सकता है लाइसेंस
आरटीओ अनिल कुमार का कहना है कि अगर पुलिस की ओर से ऐसा केस आता है कि ड्राइवर नशे में वाहन चलाते हुए मिला। इसके साथ ब्रीद एनेलाइजर की रिपोर्ट भी होती है तो ड्राइवर का लाइसेंस पहले निलंबित कर दिया जाता है। बाद में निरस्त भी किया जाता है।