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नशे की लत से मानसिक रोगी बन रहे लोग, आगरा में सात महीने में 5000 मामले सामने आए

Sat, 31 Aug 2019 12:22 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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आगरा के मानसिक स्वास्थ्य संस्थान एवं चिकित्सालय में सात महीने में ही 5000 ऐसे रोगी पहुंचे हैं जिन्हें बीमारी नशे की लत के कारण हुई। शौकिया तौर पर शुरुआत की थी, फिर लत लग गई और बीमारी ने जकड़ लिया। 
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हाथों में कंपन होने लगी, जोर से चिल्लाने लगे, नींद आती नहीं, बात बात पर झुंझलाते हैं और मारपीट तक करते हैं। 1400 की हालत तो इतनी गंभीर मिली कि भर्ती करना पड़ा। इनमें मरीजों में उदासी, चिंता, मनोविक्षिंद, उन्माद जैसी मानसिक बीमारियां मिली हैं। 

संस्थान में रोजाना करीब 230 मरीजों की ओपीडी रहती है। इसमें से 20 से 25 ऐसे मरीज हैं, जो नशाखोरी के चलते मानसिक बीमारियों के शिकार हुए। इनमें 18 से 40 साल के मरीज अधिक हैं। 
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डॉक्टरी पूछताछ में 60-70 फीसदी मरीज गांजा, भांग और नशीली दवाओं का इस्तेमाल करते पाए गए। इनकी लत ऐसी कि यह दिन में भी नशा करने से बाज नहीं आते। परिजनों के रोकने पर यह मारपीट, सामान तोड़ना, जोर-जोर से चिल्लाने जैसा व्यवहार करते हैं। कभी-कभी हिंसक भी हो जाते हैं। स्थिति असामान्य होने पर चिकित्सक के पास लेकर आए।

हिंसक हो गए, घबराहट रहने लगी

मानसिक स्वास्थ्य संस्थान एवं चिकित्सालय में आए ज्यादातर मरीज नशा न मिलने पर हिंसक हो गए। उनका व्यवहार भी बदल गया। नींद न आना, चिड़चिड़ापन, रात में सड़कों पर घूमना, भूख न लगना, बैचेनी-घबराहट जैसी दिक्कत आ रही हैं।

वरिष्ठ चिकित्सक मनोचिकित्सक डॉ दिनेश राठौर ने बताया कि गांजा, भांग और नशीली दवाओं का लंबे समय तक सेवन करने वालों में मानसिक बीमारियां मिली हैं। ओपीडी में ऐसे मरीज रोजाना 20-25 रहते हैं। इलाज और काउंसलिंग से यह पूरी तरह से ठीक हो सकते हैं। 

केस स्टडी एक:
आवास विकास कॉलोनी के 36 साल के युवक की पेंट की दुकान है। नशे के आदी लोगों के संपर्क में आने पर नशीली दवाओं का आदी हो गया। शुरुआत में परिजनों को भनक नहीं लगी, दुकान में घाटा होने पर नशे की जानकारी हुई। रोकने पर मारपीट और झगड़ा करने लगा।

केस स्टडी दो:
कागारौला निवासी 39 साल के किसान को गांजा की लत लगी। पहले छिप-छिपके पीता था, बाद में यह दिन-रात नहीं देखता। खेतीबाड़ी का काम बंद कर दिया। परिवार के समझाने पर कुछ दिन बंद किया तो बेचैनी , घबराहट बताई। दोबारा नशा करने लगा। 
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जड़ी-बूटी से नशा मुक्ति के नाम पर भी धोखा

जड़ी-बूटी से नशा मुक्ति के नाम पर कई अपंजीकृत केंद्र चल रहे हैं। इनमें कुछ ही दिनों में नशा छोड़ने का दावा कर मरीजों से ठगी की जा रही है। ऐसे में जब भी किसी केंद्र पर मरीज को लेकर जाएं, तो उसके बारे में पूर्ण पड़ताल कर कर लें। इसका पंजीकरण है कि नहीं या फिर दवाओं का लाइसेंस है कि नहीं।

क्षेत्रीय आयुर्वेद एवं यूनानी चिकित्साधिकारी डॉ. जेके राना का कहना है कि आयुर्वेद केंद्र के नाम पर बिना पंजीकरण चलने वाले केंद्रों का निरीक्षण कर इनको सील किया जाएगा।
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