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नशा मुक्ति केंद्र नहीं 'नर्क': युवक की मौत के बाद सामने आया खौफनाक सच, किसी से मिलने पर पाबंदी; होती थी पिटाई

Sat, 03 Jun 2023 10:06 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, आगरा

सार

नशा मुक्ति केंद्र में युवक की मौत के बाद यहां की ऐसी सच्चाई सामने आई, जिसे जानकर पुलिस भी हैरान है। एक बार यहां किसी भी मरीज को भर्ती करने के बाद परिवार वालों से मिलने पर पाबंदी लगा दी जाती थी। यदि कोई जिद करता तो पिटाई की जाती थी। 
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Drug de-addiction center - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आगरा के थाना मलपुरा के इटौरा स्थित संकट मोचन वृद्ध आश्रम एवं नशा मुक्ति केंद्र में शुक्रवार को फिरोजाबाद के प्रशांत कुमार (32) की मौत हो गई। इस पर संचालक और कर्मचारी भाग निकले। केंद्र में भर्ती अन्य युवकों के हंगामे पर पुलिस पहुंची। परिजन भी पहुंच गए। उन्होंने पिटाई से बेटे की मौत का आरोप लगाया। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सका है। विसरा सुरक्षित किया गया है।
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फिरोजाबाद के थाना जसराना स्थित गांव लोदपुरा निवासी गया प्रसाद किसान हैं। पत्नी रतनश्री सरकारी विद्यालय में शिक्षिका हैं। गया प्रसाद ने बताया कि बेटे प्रशांत को सिगरेट की लत थी। वो इसे छुड़ाना चाहते थे। आगरा के एक परिचित ने संकट मोचन वृद्ध आश्रम एवं नशा मुक्ति केंद्र के बारे में बताया। इस पर 16 जनवरी को प्रशांत को लेकर आए। संचालक उदित चौहान ने हर महीने 10 हजार का खर्च बताया। कहा कि दवाओं की मदद से नशा छुड़ाते हैं। इस पर बेटे को भर्ती करा दिया।

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नहीं मिलने देते थे बेटे से 

हर महीने उनसे रुपये ले लिए जाते थे। मगर, बेटे से मिलने नहीं दिया जाता था। वह पत्नी और छोटे बेटे रूपपाल के साथ 19 मई को आए थे। तब केंद्र के कर्मचारियों ने सामान ले लिया। मगर, बेटे से मुलाकात नहीं कराई। रोजाना व्यायाम और खाना खिलाने के वीडियो भेज देते थे। शुक्रवार सुबह नौ बजे थाना जसराना का सिपाही घर आया। बताया कि बेटे की तबीयत खराब है। इस पर वो केंद्र पर आए। बेटे का शव बेसमेंट में पड़ा था। संचालक और कर्मचारी केंद्र पर बाहर से ताला लगाकर फरार थे। केंद्र में 16 और मरीज थे। वह शोर मचाने लगे। इस पर पड़ोस के लोगों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने पहुंचकर सभी को मुक्त कराया।

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परीक्षा की तैयारी में लगी थी सिगरेट की लत

पिता गया प्रसाद ने बताया कि बड़ा बेटा प्रशांत बीए पास था। वह सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहा था। इसके लिए दिल्ली में एक कोचिंग करता था। इस दौरान उसे सिगरेट की लत लग गई। ज्यादा सिगरेट पीने लगा। एक साल पहले वो घर आ गया। घर में सिगरेट पीता था। इसको लेकर घर में झगड़ा भी करता था। इसलिए केंद्र में भर्ती किया। उम्मीद थी कि इलाज के बाद बेटे की नशे की लत छूट जाएगी। वह फिर से सिविल सेवा की तैयारी कर लेगा। मगर, ऐसा हो नहीं सका। उनके अरमान टूट गए।

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कैद करके रखते थे, रोजाना लगाते थे पिटाई

पिता ने आरोप लगाया कि केंद्र में बेटे को कैद करके रखा गया था। रात में आठ बजे बेटे का खाना खाते हुए वीडियो भेजा गया था। इसमें वो ठीक नजर आ रहा था। केंद्र में भर्ती कुछ युवकों ने बताया कि प्रशांत के साथ बृहस्पतिवार दोपहर को कर्मचारियों ने मारपीट की थी। इसके बाद रात में भी पिटाई लगाई थी। इससे उसकी हालत बिगड़ गई। इसके बावजूद उसे अस्पताल नहीं ले गए। इससे बेटे की जान चली गई। पुलिस ने पोस्टमार्टम कराया, लेकिन तहरीर देने पर भी संचालक और कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं किया गया।

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नहीं पता चला मौत का कारण

थाना प्रभारी तेजवीर सिंह ने बताया कि पोस्टमार्टम में मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सका है। विसरा रखा गया है। परिजन ने तहरीर नहीं दी है। तहरीर देने पर जांच कर कार्रवाई की जाएगी। नशा मुक्ति केंद्र का संचालक फरार है। इसका पंजीकरण था या नहीं, यह पता किया जाएगा। इसके लिए संचालक को बुलाया गया है। केंद्र में 16 और मरीज थे। उन्हें परिजन के सुपुर्द कर दिया गया है।

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पहले भी हो चुकी हैं घटनाएं

नशा मुक्ति केंद्र में किसी की मौत का यह पहला मामला नहीं है। इससे पूर्व भी कालिंदी विहार, सिकंदरा क्षेत्र में अवैध तरीके से संचालित नशा मुक्ति केंद्र में मौत हो चुकी हैं। बिना पंजीकरण के एक कमरे में केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। मानकों का भी ख्याल नहीं रखा जाता है। स्वास्थ्य विभाग भी कार्रवाई नहीं करता है।

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विशेषज्ञ चिकित्सक होना जरूरी

सीएमओ डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि नशा मुक्ति केंद्र के लिए विशेषज्ञ चिकित्सक होना जरूरी है। प्रथम दृष्टतया इस नाम से नशा मुक्ति केंद्र पंजीकृत नहीं है। शनिवार को इसकी जांच करवाता हूं।
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