हाईटेक कैमरों से हो यमुना और लखनऊ एक्सप्रेसवे की निगरानी
यमुना एक्सप्रेस वे पर शनिवार को हुए हादसे के बाद फिर एक्सप्रेस वे की सुरक्षा और यात्रियों की सुविधाओं पर सवाल उठाए गए हैं। अधिवक्ता और सड़क सुरक्षा कार्यकर्ता केसी जैन ने कहा है कि शौच, पानी, विश्राम आदि के लिए सुरक्षित स्थानों की कमी और वाहन चालकों के कहीं भी वाहन रोकने पर प्रतिबंध के लिए सीसीटीवी से निगरानी और चालान की कार्रवाई जरूरी है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ और मुख्य सचिव को पत्र भेज कर यमुना एक्सप्रेसवे तथा आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर दुर्घटनाओं के मूल कारणों के साथ समाधान के लिए सुझाव दिए हैं।
केसी जैन ने बताया कि यूपीडा ने बुलंदशहर एक्सप्रेसवे पर आधुनिक निगरानी और ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (सीसीटीवी/एटीएमएस) को विकसित किया है। 26 किमी. लंबे नेशनल हाईवे-34 गाजियाबाद-अलीगढ़ एक्सप्रेसवे पर 70 हाईटेक सीसीटीवी कैमरे लगाए हैं। वाहन गलत तरीके से कहीं भी रुका तो कंट्रोल रूम को जानकारी होती है। इसी मॉडल को यमुना और आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।
उन्होंने बताया कि दोनों एक्सप्रेसवे पर गिने चुने फूड प्लाजा हैं, छोटे सुविधा केंद्र उपलब्ध नहीं हैं। बसें अवैध रूप से एक्सप्रेसवे पर सवारी बिठाने और उतारने के लिए रुकती हैं। हर 20-25 किमी. पर छोटे, सुव्यवस्थित हाॅल्टिंग जोन और जन सुविधा केन्द्र हों जहां स्वच्छ शौचालय, पीने का पानी, प्रकाश व्यवस्था और बसों व निजी वाहनों के लिए सुरक्षित पार्किंग होनी चाहिए।
आगरा में 15 किमी का क्षेत्र एक्सप्रेसवे का है। हम नियमों का उल्लंघन करने वालों के फोटो खींचकर मथुरा आरटीओ के व्हाट्सएप ग्रुप पर भेजते हैं, वही उन पर कार्रवाई करते हैं।
-तुलसी राम गुर्जर, टोल प्लाजा इंचार्ज
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