आगरा में हादसों को रोकने के लिए पुलिस की सजगता सिर्फ कागजों पर ही नजर आ रही है। थाना एत्माददौला के ट्रांस यमुना फेज-दो में हाईवे पर टक्कर के बाद खड़े ट्रक को नहीं हटाया गया। सुरक्षा इंतजाम भी नहीं हुए। इससे शनिवार रात तेज रफ्तार कैंटर पीछे से ट्रक में जा टकराया। कैंटर के केबिन में लहूलुहान चालक को एक घंटे बाद कटर से केबिन काटकर निकाला जा सका, तब तक तड़पकर उसने दम तोड़ दिया। इससे रविवार को पूरे दिन वाहन रेंग-रेंगकर चलते रहे।
आगरा-फिरोजाबाद नेशनल हाईवे के ट्रांस यमुना फेज-दो स्थित गंगाराम हॉस्पिटल के सामने मेट्रो निर्माण का कार्य चल रहा है। बैरिकेडिंग लगाई गई है। यहां पर सड़क कम बची है। शनिवार शाम 4 बजे एक डंपर झरना नाला की तरफ से रामबाग की ओर जा रहा था। बैरिकेडिंग आने पर चालक ने अचानक ब्रेक लगाया, इससे राजस्थान नंबर का ट्रक डंपर से टकरा गया। ट्रक क्षतिग्रस्त हो गया। ट्रक में मक्का लदा था। सूचना पर पुलिस पहुंची लेकिन ट्रक नहीं हटा।
हाईवे पर खड़े ट्रक के आसपास कोई सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए। प्रत्यक्षदर्शियों ने पुलिस को बताया कि रात तकरीबन 12:45 बजे हरियाणा नंबर के कैंटर के चालक को ट्रक नजर नहीं आया। कैंटर, ट्रक में पीछे से टकरा गया। टक्कर इतनी जबर्दस्त थी कि कैंटर का अगला हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। चालक केबिन में ही फंस गया। लोग जुट गए लेकिन तड़प रहे चालक को निकाल नहीं सके। सूचना पर एनएचएआई और थाने की पुलिस पहुंची। मगर कुछ नहीं कर सकी।
इस पर फायर ब्रिगेड को जानकारी दी गई। सीएफएओ देवेंद्र सिंह दो दमकल के साथ पहुंचे। सीएफओ ने बताया कि दोनों वाहनों को एक अन्य वाहन से बांधकर अलग किया। इसके बाद चालक को बाहर निकालने के लिए केबिन को कटर की मदद से काटा गया। इसमें तकरीबन 30 मिनट लग गए। चालक को बाहर निकालकर अस्पताल ले गए जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।
फरीदाबाद की ट्रांसपोर्ट कंपनी का चालक था सोनू
पुलिस ने बताया कि कैंटर चालक मथुरा के जरार गांव निवासी 34 वर्षीय सोनू दुबे है। सूचना पर मृतक के भाई केके दुबे पहुंच गए। उन्होंने बताया कि सोनू दुबे फरीदाबाद की एकता ट्रांसपोर्ट कंपनी की गाड़ी चलाते थे। वह कैंटर लेकर लखनऊ से गोवर्धन की ओर जा रहे थे। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
मासूम के सिर से उठा पिता का साया
परिजन के अनुसार, सोनू परिवार में सबसे छोटे थे। उनके पीछे पत्नी और छह वर्षीय बेटी है। अचानक हुई इस घटना से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। परिजन का आरोप है कि यदि क्षतिग्रस्त ट्रक को समय रहते हाईवे से हटा दिया गया होता तो यह हादसा टल सकता था। वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि मेट्रो निर्माण कार्य के चलते यहां रोजाना हादसे हो रहे हैं। इस तरफ अधिकारी भी ध्यान नहीं दे रहे हैं।
हादसे के बाद भी नहीं ली सुध
सड़क हादसों को रोकने के लिए क्रिटिकल काॅरिडोर टीम का गठन किया गया है। वह सड़क हादसे होने पर घटनास्थल का निरीक्षण करती है। कारण पता कर उसके समाधान के प्रयास किए जाते हैं, जिससे अगली बार हादसे न हों। मगर इस मामले में पुलिस की लापरवाही सामने आई। जिस ट्रक से हादसा हुआ था, उसे हटाया नहीं गया। दोबारा हुए हादसे में कैंटर चालक की मौत हो गई। इसके बाद भी पुलिस ने ध्यान नहीं दिया। रविवार को भी क्षतिग्रस्त ट्रक वैसे ही खड़ा रहा और पूरा दिन राहगीर जाम में फंसकर व्यवस्थाओं को कोसते रहे। इस दौरान अगर कोई और हादसा होता तो कौन जिम्मेदार होता।
दो क्रेन लगाने पर भी नहीं हटा ट्रक
जिस ट्रक की वजह से हादसा हुआ, उसमें मक्का भरा था। दो क्रेन की मदद से ट्रक को हटाने का प्रयास किया लेकिन नहीं हट सका। इस पर बोलार्ड आदि लगा दिए गए थे। मगर कैंटर चालक बोलार्ड को नहीं देख सका। वह उन्हें तोड़ता हुआ ट्रक में जा घुसा। ट्रक मालिक को बुलाया गया है। उनके आने पर माल को खाली कराने के बाद ट्रक को हटाया जाएगा।
-शेषमणि उपाध्याय, एसीपी छत्ता
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