आगरा। मानसून की बारिश में नालों के चोक होने की प्रमुख वजह चमड़े की कतरन के बैग हैं। तीन दिनों की बारिश में हर दिन शहर की सड़कों पर पानी भरा और सड़कों के जगह-जगह धंसने की समस्या भी आई। नगर निगम प्रशासन को नालों की जांच कराने पर यह बात पता चली।
काजीपाड़ा, मंटोला, टेढ़ी बगिया, पूर्वी गेट, भैरो नाला, महावीर नाला, अशोक नगर, बोदला, लोहामंडी, खतैना आदि जगहों पर नालों में पुलिया के नीचे चमड़े की कतरन से भरे बैग फंसे मिले। अपर नगर आयुक्त शिशिर कुमार ने इस मामले में सेनेटरी इंस्पेक्टरों की रिपोर्ट पर जेडएसओ (वाहन एवं मेंटेनेंस वर्कशॉप) से जवाब मांगा है। अपर नगर आयुक्त ने पूछा है कि 600 से ज्यादा जूता कारखानों से चमड़े की कतरन लेने का काम नगर निगम कर रहा था लेकिन सेनेटरी इंस्पेक्टरों के मुताबिक अप्रैल से वाहन नहीं पहुंच रहे हैं। यह वाहन क्यों बंद हुए, इसका जवाब दें।
उठान के लिए लगी थी 12 गाड़ियां
नगर निगम ने दो साल पहले चमड़े की कतरन, पेठे का कचरा और गोबर के लिए 12 गाड़ियां लगाई थीं। कारखानों, पेठा इकाइयों में जाकर यह कचरे का उठान करती थीं। पेठे के लिए नारंगी रंग, चमड़े की कतरनों के लिए गुलाबी और गोबर के लिए पीले रंग की गाड़ी थी। हर जोन में तीन-तीन वाहन संचालित थे लेकिन अब अप्रैल से व्यवस्था बंद है। ऐसे में करीब 3500 मीट्रिक टन चमड़े की कतरन इन चार महीनों में नालों में समा गई।
24 घंटे बाद भी नहीं निकला पानी
बल्केश्वर, राजपुर चुंगी, लंगड़े की चौकी, ट्रांसयमुना, टेढ़ी बगिया, ताजगंज, फतेहाबाद समेत क्षेत्रों में हुए जलभराव में नालों के किनारे 24 घंटे बाद भी पानी भरा रहा। नगर निगम ने 65 जगह पंपसेट लगाकर पानी निकालने की कोशिश की लेकिन पानी नहीं निकला। राजेश्वर मंदिर के पास राजपुर चुंगी में डबल पेट्रोल पंप के पास सड़क की एक लेन और साइड पटरी पर शनिवार शाम तक पानी भरा रहा। इसे निकालने के लिए जेटिंग मशीनें लगाई गईं। परिक्रमा की वजह से रात में भी काम कराया गया।