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बीएसए से हुई बड़ी चूक, पहले बर्खास्त किए शिक्षक, अब सेवाएं होंगी बहाल

Thu, 25 Oct 2018 01:50 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
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धरने पर बैठे बर्खास्त शिक्षक - फोटो : अमर उजाला
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आगरा में फर्जी प्रमाणपत्र लगाने के आरोप में बेसिक शिक्षा अधिकारी ने 26 सितंबर 2018 को परिषदीय स्कूलों के सात शिक्षकों को बर्खास्त किया था। शिक्षकों को नोटिस दिए बिना सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की गई थी। 
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शिक्षकों ने बर्खास्तगी का विरोध किया, प्रमाणपत्र सही बताकर दोबारा जांच कराने की मांग की। दोबारा जांच में डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय ने दो शिक्षकों के पक्ष में रिपोर्ट दी है। इस पर उनकी सेवा जारी की जा रही है। 

वर्ष 2016 में प्रदेश में हुई 16448 शिक्षक भर्ती में इन सातों शिक्षकों ने जिले में नियुक्ति पाई थी। बीएसए कार्यालय की ओर से शिक्षकों के शैक्षणिक प्रमाणपत्रों का सत्यापन कराया गया। 
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ये शिक्षक हुए बर्खास्त

परीक्षा नियामक प्राधिकारी के यहां से दी गई रिपोर्ट के मुताबिक पूजा सिंह, सहायक अध्यापिका, प्राथमिक विद्यालय मिडकौली बाह, अशोक कुमार, सहायक अध्यापक, प्राथमिक विद्यालय तुर्रक पुरा जगनेर, वेद प्रकाश, सहायक अध्यापक, प्राथमिक विद्यालय लालपुरा पिनाहट, अंजू गुप्ता, सहायक अध्यापिका, प्राथमिक विद्यालय गढ़ी थाना शमसाबाद और विकास सिंह प्राथमिक विद्यालय बड़ा गांव, जैतपुर कला के टीईटी के प्रमाणपत्र के रिकार्ड मौजूद नहीं पाए गए। विभाग ने इनके प्रमाणपत्र को फर्जी मानते हुए बर्खास्तगी की कार्रवाई की।  

 वहीं, डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय की सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर तन्वी गुप्ता, सहायक अध्यापिका प्राथमिक विद्यालय नगला धीरे शमासाबाद
की बीएससी की डिग्री को फर्जी माना गया। प्रीति सिकरवार, सहायक अध्यापिका मंडा की गढ़ी के बीकॉम के अंकों में भिन्नता पाई गई। 

इन दोनों शिक्षकों को भी बर्खास्त कर दिया गया। अगले ही दिन शिक्षकों ने बीएसए कार्यालय में विरोध प्रदर्शन किया। नोटिस दिए बिना बर्खास्तगी की कार्रवाई की विरोध किया। अब करीब एक माह बाद दूसरी सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर तन्वी गुप्ता व प्रीति सिकरवार को बहाल किया जा रहा है।  

शिक्षकों के पक्ष में आई रिपोर्ट

इस संबंध में बेसिक शिक्षा अधिकारी आनंद प्रकाश ने बताया कि डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय और परीक्षा नियामक प्राधिकारी के यहां से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर शिक्षकों को निलंबित किया गया था। अब ये शिक्षकों के पक्ष में रिपोर्ट दे रहे हैं।

ऐसे में बर्खास्तगी से पहले नोटिस न जारी करना हमारी चूक रही है। विश्वविद्यालय की डिग्री लगाने वाले दोनों शिक्षकों को तत्काल रूप से बहाल किया जाएगा। बाकी शिक्षकों पर परीक्षा नियामक प्राधिकारी के यहां से रिपोर्ट प्राप्त होने पर निर्णय लिया जाएगा।

तीन सदस्यीय जांच समिति बनाई

विश्वविद्यालय की सत्यापन रिपोर्ट बदलने की भी जांच कराई जाएगी। बीएसए स्तर से तीन सदस्यीय कमेटी बनाई गई है। इसमें दो खंड शिक्षा अधिकारी व वित्त एवं लेखाधिकारी हैं। बीएसए का कहना है कि गड़बड़ रिपोर्ट देने के लिए जो भी जिम्मेदार होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। 
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बर्खास्त शिक्षक अनिश्चितकालीन धरने पर     

वहीं बर्खास्त किए गए सात में छह शिक्षक (वेदप्रकाश को छोड़कर) बुधवार का बीएसए कार्यालय पर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे। इन शिक्षकों की मांग है कि उन्हें बहाल किया जाए या फिर जेल भेजा जाए। 

बीएसए ने परीक्षा नियामक प्राधिकारी से बात की है, पांच में तीन शिक्षकों के टीईटी के प्रमाणपत्र सही बताए जा रहे हैं। बीएसए का कहना है कि परीक्षा नियामक प्राधिकारी के यहां से जिन शिक्षकों के पक्ष में रिपोर्ट आएगी, उनकी सेवा जारी कर दी जाएगी। 

बीएसए के सामने बड़ा संकट यह खड़ा हो गया है कि जिन शिक्षकों की सेवा फिर से जारी की जा रही है, उनकी सेवा बाधित होने से कैसे बचाया जाए। शिक्षकों का कोई दोष नहीं है। बीएसए का कहना है कि ऐसी व्यवस्था बनाई जाएगी, जिससे शिक्षकों को नुकसान न हो।  
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