डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय
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डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय प्रशासन वर्ष 2015 से 2018 तक के छात्र-छात्राओं की डिग्री उनके घर भेजने की व्यवस्था बना रहा है। आवासीय संस्थानों के विद्यार्थियों के पतों का सत्यापन कराया जा रहा है। दिक्कत कॉलेजों की डिग्री के संबंध में आ रही है। इस पर विश्वविद्यालय प्रशासन अभी कोई निर्णय नहीं ले पा रहा है।
विश्वविद्यालय परिसर के संस्थानों में छात्रों की संख्या सीमित है। संस्थानों में संबंधित चारों वर्षों के छात्र-छात्राओं का पता भी मौजूद है। डिग्री विभाग के प्रभारी प्रो. अनिल वर्मा का कहना है कि सभी संस्थानों में छात्रों के पतों का फिर से सत्यापन कराया जा रहा है।
जिससे डिग्री घर भेजे जाने पर वह वापस न हो। डिग्री घर पर भेजने में अच्छा-खासा पैसा खर्च होता है। अभी यह व्यवस्था बनाई जानी है कि आवासीय संस्थानों के विद्यार्थियों की डिग्री सत्यापित पते पर विश्वविद्यालय ही भेजेगा या फिर संबंधित संस्थानों के माध्यम से भिजवाई जाएगी।
संबद्ध कॉलेजों में महज 56 कॉलेज ही राजकीय व एडेड हैं, बाकी स्ववित्तपोषित हैं। इनके माध्यम से विद्यार्थियों की डिग्री उनके घरों पर निशुल्क कैसे पहुंचाई जाए, इसकी व्यवस्था नहीं बन पा रही है। अब परीक्षाएं संपन्न होने के बाद ही इस पर निर्णय लिया जाएगा।
ऑनलाइन आवेदन का निस्तारण समय पर नहीं हो पा रहा
विश्वविद्यालय प्रशासन की समस्या है कि उनके पास जितनी डिग्रियां रखीं हैं, उस अनुपात में आवेदन नहीं हो रहे हैं। वहीं, जो आवेदन हो रहे हैं उनको समय पर डिग्री नहीं मिल पा रही है। दो वर्ष में ऑनलाइन डिग्री के लिए करीब 45 हजार आवेदन हुए। इसमें से 28 हजार के करीब डिग्रियां दी गईं हैं, बाकी लंबित हैं। तमाम छात्रों की डिग्री दो-ढाई वर्ष में भी नहीं पहुंच पाई है।
उनको संदेश भी नहीं भेजा जाता कि किस वजह से डिग्री रुकी हुई है। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अशोक मित्तल का कहना है कि प्रत्येक आवेदन के निस्तारण की निगरानी की व्यवस्था बनाई जा रही है। इसी उद्देश्य से प्रोफेसर को डिग्री विभाग का प्रभारी बनाया गया है।
गेट पास नहीं बनाया, हेल्पडेस्क पर आवेदन लिए
शुक्रवार को भी विश्वविद्यालय में प्रवेश के लिए बाहरी व्यक्तियों का पास नहीं बनाया गया। हेल्पडेस्क पर आवेदन लिए गए, आवेदन पर आवेदकों से फोन नंबर लिखवाए जा रहे हैं।