डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह की गोल्डन गर्ल शिवानी
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आगरा में डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के 86वें दीक्षांत समारोह में एसएन मेडिकल कॉलेज की एमबीबीएस फाइनल प्रोफेशनल की छात्रा शिवानी सिंह पर सोना बरसेगा। उन्हें 12 स्वर्ण पदक और एक रजत पदक दिया जाना है। विवि प्रशासन की ओर से बृहस्पतिवार को वेबसाइट पर पदकों की प्राथमिक सूची डाल दी गई। इस पर आपत्तियां स्वीकार की जाएंगी।
योग्यता निर्धारण समिति के संयोजक प्रो. मनोज श्रीवास्तव ने बताया कि शिवानी के बाद राजकीय कन्या महाविद्यालय, सिरसागंज की एमए हिंदी अंतिम वर्ष की छात्रा उपासना को पांच, एमजीएम पीजी कॉलेज, फिरोजाबाद की बीए अंतिम वर्ष की नम्रता और केए पीजी कॉलेज, कासगंज के उदित माहेश्वरी को चार-चार पदक मिलेंगे।
वहीं, एसएन महाविद्यालय विनोदपुर, भोगांव के बीएससी अंतिम वर्ष के दीपांशु शाक्य, श्री शारदा जौहरी नगर पालिका कन्या महाविद्यालय, कासगंज की बीए अंतिम वर्ष की लिली राजपूत और इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज की एमएसडब्ल्यू के सोहन को तीन-तीन पदक मिलेंगे। प्रो. मनोज श्रीवास्तव का कहना है कि पदक सूची देखकर 20 मार्च तक संबंधित कॉलेज के प्राचार्य से प्रमाणित कराकर आपत्तियां दी जा सकती हैं।
विवि: 73 पदक छात्राओं के खाते में
समारोह में कुल 104 पदक दिए जाने हैं। इसमें 90 स्वर्ण और 14 रजत पदक हैं। 73 पदक छात्राओं के खाते में हैं। इसमें 63 स्वर्ण और 10 रजत पदक है। छात्रों के हिस्से 31 पदक ही आएंगे। इसमें से 27 स्वर्ण और चार रजत पदक है।
गत चार वर्षों की गोल्डन गर्ल
- वर्ष 2019 - एफएच मेडिकल कॉलेज, एत्मादपुर की आकांक्षा को 11 स्वर्ण पदक मिले थे।
- वर्ष 2018 - रामा मेडिकल कॉलेज, कानपुर की अवर्णा को 13 स्वर्ण, 01 रजत पदक मिला।
- वर्ष 2017 - रामा मेडिकल कॉलेज, कानपुर की अपर्णा मथकला को आठ स्वर्ण पदक मिले।
- वर्ष 2016 - एसएन मेडिकल कॉलेज, आगरा की दीक्षा अग्रवाल को 07 स्वर्ण, 01 रजत पदक मिला।
न्यूरो सर्जन बनना चाहती हैं शिवानी
गोल्डन गर्ल शिवानी सिंह अलीगढ़ में रामघाट रोड की रहने वाली हैं। दीक्षांत समारोह में सर्वाधिक पदक मिलने की खबर पाकर उनकी खुशी का ठिकाना नहीं है। पदक राज्यपाल के हाथों मिलेगा। शिवानी ने बताया कि वह न्यूरो सर्जन बनना चाहती हैं। उनकी बचपन से इच्छा डॉक्टर बनने की है। पिता नरेंद्र चौधरी सरकारी ठेकेदार हैं। मां शशी चौधरी गृहिणी हैं। दो छोटे भाई हैं, एक सिविल इंजीनियरिंग कर रहा है तो दूसरा कक्षा 10वीं में पढ़ रहा है। शिवानी अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और परिवार को देती हैं। शिवानी का कहना है कि उन्होंने पूरे मन और लगन से पढ़ाई की। शिक्षकों ने जो बताया उसका पालन किया।
संदेश: हर चीज की चाबी मेहनत
जूनियर्स के लिए इनका संदेश है कि हर चीज की चाबी मेहनत है। परीक्षा के समय ही नहीं, सत्र के शुरूआत से समय सारिणी बनाकर पढ़ाई करनी चाहिए।