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सहफसली से एक उपज में दोहरा लाभ, बदली खेती की सूरत

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कासगंज में गन्ना की फसल के साथ होती आलू की फसल - फोटो : KASGANJ
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कासगंज। जिले के तमाम किसानों ने सहफसली से खेतीबाड़ी की सूरत ही बदल दी। एक उपज मे दोहरा लाभ कमाकर ये किसान अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन गए हैं। ये पारंपरिक खेती से इतर आधुनिक खेती से आर्थिक समृद्ध ही नहीं हो रहे अपितु प्रगतिशील किसानों की श्रेणी में शामिल होकर प्रसिद्धि भी हासिल कर रहे हैं।
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जिले में सहफसली की शुरुआत यूं तो काफी समय पहले हो चुकी है लेकिन पिछले कुछ सालों से काफी किसान इसमें रुचि ले रहे हैं। राधेश्याम, मनमोहन, हरी सिंह, चंद्रभान ही नहीं अपितु कई किसान अब एक ग्रुप बनाकर आधुनिक खेती कर रहे हैं। एक खेत में एक बार में दो-दो फसलें पैदा कर रहे हैं और उपज भी ऐसी कि जो दोहरा लाभ दे। अब जिले के अन्य किसान भी इनके नक्शेकदम पर चलने की योजना बना रहे हैं।
इस तरह कमा रहे दोहरा लाभ
कृषि यंत्रों से मुख्य फसलों के बीच खाली जगहों में अन्य कई प्रकार की फसल उगाकर किसान अतिरिक्त मुनाफा कमा रहे हैं। केले की फसल के बीच मिर्च, टमाटर आदि की फसल की जा रही है।
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वहीं गन्ने की फसल के बीच मैंथा, अरबी, आलू की फसल तैयार करते हैं। इसके अलावा मक्का की फसल में शिमला मिर्च तैयार की जा रही है।
चंद्रभान पेश कर रहे अनूठी मिसाल
सहफसली की अनूठी मिसाल पेश करने में सबसे आगे चंद्रभान हैं। क्षेत्र के गांव मेमड़ी निवासी चंद्रभान को राज्यस्तर पर ही नहीं अपितु कई बार राष्ट्रीय स्तर पर भी पुरस्कार मिले हैं। चंद्रभान का कहना है कि उद्यान और कृषि विभाग के अधिकारियों ने उन्हें नकदी और सहफसली के लिए प्रेरित किया तो उनमें उम्मीद जगी और अब कम आमदनी में सहफसली से दोहरा लाभ कमा रहे हैं। इन दिनों मक्का की फसल के साथ शिमला मिर्च की फसल ढाई बीघा खेत में बोई है। सहफसली से फायदा होता है। इसमें सिंचाई और खाद की लागत तो एक फसल के बराबर होती है और उपज दो फसलों की मिल जाती है।
वर्जन-
- सहफसली खेती से किसान दोहरा लाभ कमा रहे हैं। गन्ना, केला, मक्का, के साथ सब्जियों की खेती करने में किसान रुचि दिखा रहे हैं। अन्य किसान भी इनसे प्रेरणा लें।
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योगेश कुमार, जिला उद्यान अधिकारी।
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