आगरा में दयालबाग के मुरली बाग में 16 साल पहले हुए दोहरे हत्याकांड के केस में आरोपी रामराज, गीतेंद्र और प्रेम कुमार को दोषी पाते हुए स्पेशल जज एससी-एसटी एक्ट रामनरेश मौर्य ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। प्रत्येक पर एक-एक लाख रुपये अर्थदंड भी लगाया है। वहीं एक आरोपी अखिलेश को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया।
घटना 29 सितंबर 2003 की है। मुरली बाग, दयालबाग निवासी राजवीर सिंह पुत्र होतीलाल का भाई मकान बनवा रहा था। 28 सितंबर 2003 को मकान के बगले में रहने वाले रामराज के घर में मलबा गिर गया था। इस बात पर दोनों में कहासुनी हो गई।
तब तो मोहल्ले के लोगों ने विवाद शांत करा दिया। मगर, अगले दिन फिर से विवाद होने लगा। रामराज, चित्राहाट के गांव पास निवासी गीतेंद्र सिंह और सरला बाग स्थित आरएस बाग निवासी प्रेम कुमार गुप्ता असलहे लेकर आ गए। उन्होंने लाइसेंसी हथियार से फायरिंग कर दी।
एक गोली राजवीर के पिता होतीलाल को, जबकि दूसरी रास्ते से निकलकर जा रही पूजा वाल्मीकि को लग गई। इसमें दोनों की मौत हो गई। इस केस की विवेचना तत्कालीन सीओ हरीपर्वत ने की। उनके स्थानांतरण के बाद सीओ अछनेरा ने की। केस में विवेचना के दौरान मैनपुरी के औछा स्थित गांव नाहिन नगरिया निवासी अखिलेश का भी नाम सामने आया।
पुलिस ने 20 अक्तूबर 2003 को रामराज राठौर, गीतेंद्र सिंह और प्रेमकुमार के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। वहीं 18 दिसंबर 2003 को अखिलेश के खिलाफ चार्जशीट लगाई। अखिलेश पर आरोप लगा कि घटना के बाद वह हथियार लेकर फरार हो गया।
एडीजीसी हेमंत दीक्षित ने बताया कि केस में दस गवाह और साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। स्पेशल जज (एससी-एसटी एक्ट) रामनरेश मौर्य ने रामराज, गीतेंद्र सिंह और प्रेम कुमार को हत्या का दोषी पाते हुए आजीवन करावास की सजा सुनाई।
एक-एक लाख रुपये जुर्माना भी लगाया। जुर्माना राशि से 50-50 हजार रुपये मृतकों के परिजनों को अदा करने होंगे। अर्थदंड अदा नहीं करने पर एक-एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा। वहीं अभियुक्त अखिलेश को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। इस मामले में पैरवी कर अभियुक्तों को दंड दिलाने पर पैरोकार थाना न्यू आगरा को एसएसपी ने पुरस्कृत किया।