चंबल नदी में अटेर के मघारा घाट पर डॉल्फिन का शव मिलने से वन विभाग में हड़कंप मच गया। वन विभाग ने शव को पोस्टमार्टम के लिए मुरैना भेजा है। बता दें कि गंगेटिक डॉल्फिन गंगा और चंबल नदी में मिलती हैं। चंबल में इनकी संख्या 74 है।
दुनिया में संकटग्रस्त प्रजाति की सूची में शामिल गंगेटिक डॉल्फिन को 2009 में राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित किए जाने के साथ ही चंबल नदी में इनके संरक्षण पर काम हो रहा है। बुधवार देर शाम अटेर के मघारा घाट पर वन विभाग की सर्वे टीम को डॉल्फिन मछली मृत मिली।
बाह के नंदगवां घाट के दूसरे छोर पर मघारा घाट का इलाका है। अटेर के रेंजर रघुवीर रायकवार ने डॉल्फिन के शव के पोस्टमार्टम के लिए गुरुवार को पशु चिकित्सा अधिकारी को बुलाया, लेकिन उन्होंने दुर्लभ प्रजाति की डॉल्फिन की मौत की असल वजह जानने के लिए विशेषज्ञों से पोस्टमार्टम कराने का सुझाव दिया।
डॉल्फिन के शव को मुरैना ले जाया गया है। जहां पर ग्वालियर के विशेषज्ञ पोस्टमार्टम करेंगे। वहीं शव मिलने के बाद बाह इटावा रेंज में भी निगरानी बढ़ा दी गई है। इटावा के रेंजर सर्वेश भदौरिया, बाह के रेंजर अमित सिसौदिया ने बताया कि दोनो रेंजों में कोई डॉल्फिन या घड़ियाल अस्वस्थ नहीं मिले हैं।