बार-बार जुकाम-खांसी से कान पर भी असर पड़ रहा है। इससे सूजन, दर्द के साथ संक्रमण भी हो रहा है। लंबे समय तक ऐसी स्थिति से ऊंचा सुनने की परेशानी हो रही है। मर्ज बढ़ने पर कान का पर्दा भी खराब होने का खतरा रहता है। ऐसे में कॉक्लियर इम्प्लांट करने की जरूरत पड़ती है। फतेहाबाद रोड स्थित होटल में सिजीकॉन-2026 में डॉक्टरों ने बीमारी और बचाव पर व्याख्यान दिए।
जयपुर से आए लेफ्टिनेंट जनरल डॉ. डीएम वेंकटेश ने बताया कि बार-बार जुकाम-खांसी से नाक और गले का बलगम यूस्टेशियन ट्यूब बंद होने लगता है। इससे कान में दबाव पड़ता है। सूजन और दर्द से मरीज को परेशानी होती है। ऐसे ही कान के पर्दे के पीछे मवाद पड़ने से ओटिटिस मीडिया (मध्य कान का संक्रमण) की परेशानी बनने लगती है। इससे सुनने की क्षमता प्रभावित होती है, ऊंचा सुनाई देता है। अधिकांश ये बच्चों में परेशानी मिल रही है। कार्यशाला में राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. माधुरी गोरे, डॉ. रश्मि अग्रवाल, डॉ. गौरव गुप्ता, डॉ. नरेश पांडा, डॉ. रजत कपूर, डॉ. अरविंद गुप्ता आदि ने भी व्याख्यान दिए।