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Agra News: उपचार के दबाव में डॉक्टर बीमार... मधुमेह-कोलेस्ट्रॉल और तनाव का शिकार

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डॉ. रुचिका गर्ग और डॉ. प्रभात अग्रवाल।
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आगरा। काम के दबाव और कम नींद के कारण दूसरों का इलाज करने वाले डॉक्टर भी बीमार पड़ रहे हैं। इनमें मधुमेह, उच्च रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल की बीमारी बढ़ रही है। इससे व्यवहार में चिड़चिड़ापन देखा जा रहा है। एसएन मेडिकल कॉलेज के चिकित्सक दंपती की ओर से देशभर के 627 डॉक्टरों पर किए गए ऑनलाइन सर्वे में ये खुलासा हुआ है।
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एसएन के मेडिसिन विभाग के डॉ. प्रभात अग्रवाल, स्त्री रोग विभाग की डॉ. रुचिका गर्ग और कोलकाता के डॉ. शंभु सम्राट समाजदार ने देशभर के 627 सरकारी-निजी चिकित्सकों पर ऑनलाइन सर्वे किया। इसमें 40 साल से अधिक उम्र के 364 पुरुष और 263 महिला चिकित्सकों को शामिल किया गया।
डॉ. प्रभात अग्रवाल ने बताया कि इसमें 38 फीसदी चिकित्सक मोटापे के शिकार मिले। आठ फीसदी धूम्रपान और पांच फीसदी रोजाना शराब पीते थे। 15 फीसदी पांच घंटे से कम नींद ले पाते हैं। 38 फीसदी डॉक्टरों ने माना कि सप्ताह में 4 दिन रात को चिकित्सकीय सेवा से नींद में खलल पड़ती है। इसके कारण 15 फीसदी डॉक्टरों में मधुमेह और 24 फीसदी में उच्च रक्तचाप की दिक्कत मिली। अनिद्रा, तनाव और चिड़चिड़ापन की परेशानी भी झेल रहे हैं। इससे उनकी कार्यशैली और व्यवहार भी प्रभावित हो रहा है।
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मरीजों का दबाव, इमरजेंसी कॉल से तनाव
सर्वे में शामिल स्त्री रोग विभाग की डॉ. रुचिका गर्ग ने बताया कि तनाव की सबसे बड़ी वजह मरीजों का दबाव है। 55 फीसदी डॉक्टरों ने माना कि अत्यधिक मरीजों के कारण तनाव होता है। 40 फीसदी डॉक्टरों ने कहा कि इमरजेंसी कॉल और मेडिको लीगल के मामले से तनाव हो रहा है। इसके अलावा 68 फीसदी का मानना है कि कम नींद से सेहत पर असर पड़ रहा है, जिससे बीमारियों की गिरफ्त में आ रहे हैं।


ये दिए सुझाव:
- रोजाना 6-8 घंटे सोएं, एकमुश्त स्वस्थ नींद लें।
- तनाव से बचने के लिए परिवार संग समय बिताएंं।
- धूम्रपान-एल्कोहल के सेवन और देर रात भोजन करने से बचें।

कम नींद, खराब फिटनेस भी बना रही बीमार

- डॉ. प्रभात अग्रवाल ने बताया कि मेडिसिन विभाग की ओपीडी में रोजाना औसतन 650 मरीज आ रहे हैं। इनमें मोटापा, धूम्रपान-एल्कोहल, मोबाइल-लैपटॉप का देर रात तक कार्य करना, कम नींद और खराब फिटनेस की वजह से 30-45 साल के मरीजों में तेजी से मधुमेह, कोलेस्ट्रॉल, उच्च रक्तचाप की बीमारी मिल रही है। ओपीडी में आने वाले 42 फीसदी में ये दिक्कत मिल रही है। इनको दिनचर्या सुधारने के साथ पौष्टिक भोजन की भी सलाह दे रहे हैं।
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डॉ. रुचिका गर्ग और डॉ. प्रभात अग्रवाल।

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