हवा में धूल-धुआं से सांस लेना दूभर हो रहा है, ऐसे में चिकित्सकों की लोगों से अपील है कि दिवाली पर पटाखे कतई न चलाएं। पटाखों से निकलने वाली खतरनाक गैस से सांस रोग, नाक में एलर्जी, जुकाम, गले में खराश, फेफड़ों में संक्रमण जैसे तमाम मर्ज बढ़ा देती है, स्वस्थ लोगों को भी परेेशानी होने लगती है। सीएमओ डॉ. आरसी पांडेय ने कहा कि पटाखों से बीमारी बढ़ती है, बीमार लोगों का मर्ज तीन से पांच गुना तक बढ़ जाता है। ऐसे में लोग रोशनी कर खुशियां मनाएं।
टीबी-सांस रोगियों की पांच गुना बढ़ जाती है तकलीफ
एसएन कॉलेज के टीबी-सांस रोग विभागाध्यक्ष डॉ. संतोष कुमार ने कहा कि पटाखों से निकलने वाला धुआं और खतरनाक गैस सांस नली से फेफड़ों में पहुंचकर संक्रमण करती हैं। नली में सूजन होने से सांस लेने में परेशानी होती है। मरीजों की पांच गुना तकलीफ बढ़ जाती है।
आंखों को पहुंचता है नुकसान
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. निखिल गुप्ता ने बताया कि पटाखे-फुलझड़ी के तिलंगे और रॉकेट आंख की कॉर्निया को नुकसान पहुंचाते हैं। पिछली बार खासतौर से बच्चों के आंखों को नुकसान पहुंचा। ऐसे में पटाखे न जलाएं और रोशनी कर खुशियां मनाएं।
पटाखों से जलने का खतरा
एसएन मेडिकल कॉलेज के त्वचा रोग विभागाध्यक्ष डॉ. यतेंद्र चाहर ने कहा कि पटाखों से पूरी तरह दूरी बनाएं। इसके जलाने से हाथ-पैर और शरीर में अन्य हिस्सों के जलने का खतरा अधिक है। कई बार बड़े हादसे होने से ताउम्र जख्म का निशान रह जाता है।
कई दिन तक सताता है जुकाम
नाक, कान और गला रोग विशेषज्ञ डॉ. गौरव खंडेलवाल ने बताया कि प्रदूषण से नाक में एलर्जी, छींक आना, गले में खराश की परेशानी वाले मरीज आ रहे हैं। पटाखों के चलाए जाने से यह मर्ज कई दिन तक रह सकती है। बच्चों और बुजुर्गों में सबसे ज्यादा परेशानी होती है।