रोशनी के पांच दिन के महापर्व का शुभारंभ शुक्रवार को धनतेरस के साथ हो गया। बाजार सज गए हैं। घर भी संवर गए हैं। धनतेरस पर इस बार उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में ब्रह्म, सर्वार्थ सिद्धि और वैधृति कामहायोग बन रहा है। यह यश, वैभव, देश की सुरक्षा और बेहतर स्वास्थ्य देने वाला है।
इसमें आरोग्य प्राप्ति के लिए भगवान धनवंतरी और समृद्धि के लिए कुबेर के साथ लक्ष्मी-गणेश का पूजन किया जाएगा। आचार्य डॉ. हरिगोपाल शर्मा (भागवत किंकर) ने बताया कि धनतेरस पर लॉकर में स्वस्तिक बनाकर लाल कपड़ा बिछाएं।
इस पर खील रखें। दीपक जलाएं। खील पर लक्ष्मी-गणेशजी वाला चांदी का सिक्का रखें। साथ में धनिया, गुड़, कमल गट्टे रख दें। खील पर रखे सिक्के को कुबेर मानकर पूजा करें।
बटेश्वर में होगा दीपदान
ज्योतिषाचार्य शिव शरण पाराशर ने बताया कि शुक्रवार की शाम 6:40 बजे से शनिवार शाम 3:15 बजे तक धनतेरस रहेगी। अकाल मृत्यु से बचने के लिए रात में घर के दरवाजे पर 4 बत्तियों का दीपक जलाना चाहिए। बटेश्वर के पुजारी जय प्रकाश गोस्वामी ने बताया कि शुक्रवार को महायोग बनने की वजह से भोले के दरबार में दीपदान के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचेंगे।
नरक चतुर्दशी: बरसेगी हनुमानजी की कृपा
इसे नरक चतुर्दशी कहा जाता है। यह 26 अक्तूबर को मनाई जाएगी। हनुमानजी का पूजन करें, उन्हें चोला अर्पित करें। उनकी कृपा बरसेगी। शाम के समय देहरी पर पांच, सात या 11 दीए जलाएं, इससे सुख शांति एवं समृद्धि आती है।
इसे रूप चौदस के रूप में भी मनाए जाने की परंपरा है। प्रात:काल तेल लगाकर स्नान करने से सौंदर्य बना रहता है। मान्यता है कि भगवान विष्णु ने इस दिन वामन के रूप में अवतार लिया था।
दिवाली: महालक्ष्मी भरेंगी खजाना
धर्माचार्यों का कहना है कि इस दिन समुद्र मंथन के समय महालक्ष्मी का प्राकट्य हुआ था। सुख, शांति एवं समृद्धि पाने का सबसे शुभ दिन है। व्यापारिक प्रतिष्ठानों एवं घरों में गणेशजी, महालक्ष्मी, महासरस्वती का विधि विधान से पूजन किया जाता है।
आचार्य डॉ. हरिगोपाल शर्मा ने बताया कि व्यापारिक प्रतिष्ठानों के लिए सुबह 8:15 से 940 का मुहूर्त है। इसके बाद 9:40 से 12:25 तक लाभ अमृत बेला है। 12 से 12:15 तक अभिजीत मुहूर्त है। 1:45 से तीन बजे तक भी शुभ मुहूर्त है। घरों में पूजन का मुहूर्त शाम को छह से रात साढ़े आठ बजे तक का है।
गोवर्धन अन्नकूट पूजा 28 को
दिवाली से अगले दिन गोवर्धन अन्नकूट पूजा होगी। ब्रज में इसका खास महत्व है। कहा जाता है कि इंद्र ने कोप में आकर घनघोर वर्षा की थी। ब्रजवासियों को बचाने के लिए भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को धारण किया था। गिरिराज धरण की पूजा की जाती है। उनको भोग लगाया जाता है।
भैया दूज: यम के फंद से मिलेगी मुक्ति
भाई बहन के पावन प्रेम का यह पर्व 29 अक्तूबर को मनाया जाएगा। इस दिन भाई-बहन यमुना में साथ स्नान करते हैं। कहा जाता है कि ऐसा करने से यम के फंद से मुक्ति मिल जाती है। प्राणी की अकाल मृत्यु नहीं होती है।