हौसले बुलंद हों तो दिव्यांगता कभी सफलता में बाधा नहीं बनती। जन्म से दोनों हाथों से दिव्यांग शिकोहाबाद का युवक अजय इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है। संत जनू बाबा कॉलेज माडई के छात्र अजय ने पैरों से कलम थामी और वर्ष 2018 में बीएससी तक की पढ़ाई पूरी की। आर्थिक रूप से कमजोर अजय को सरकारी मदद से ज्यादा खुद पर भरोसा है। तभी तो उसने सरकार की किसी भी कल्याणकारी योजना का लाभ नहीं लिया।
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'खुद पर विश्वास तो क्यूं लें सरकारी मदद'
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पैर की अंगुलियों में पेन फंसाकर लिखती अजय
- फोटो : अमर उजाला
मैनपुरी चौराहा शिकोहाबाद निवासी रमेश चंद्र के 23 वर्षीय बेटा अजय बीएससी उत्तीर्ण करके अब एमएससी की तैयारी कर रहा है। बेलदारी करने वाले उसके पिता रमेश चंद का साया उसके सिर से उठ गया। मां शारदा देवी ने उसे प्राइमरी स्कूल में दाखिला कराया था।
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दिव्यांग अजय
- फोटो : अमर उजाला
अजय ने हौसला दिखाते हुए अपनी दिव्यांगता को ही हथियार बना लिया। हाथ नहीं तो क्या हुआ उसने पैर की अंगुलियों से कलम थामी और फर्राटेदार अंदाज में लिखने लगा। अजय अब बीएससी (जंतु विज्ञान) से स्नातक है।
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दिव्यांग अजय
- फोटो : अमर उजाला
अजय की मानें तो कई बार वो विकास भवन आ चुका है। लोगों ने उसे दिव्यांग पेंशन, छात्रवृत्ति योजना, मां के लिए विधवा पेंशन जैसी कल्याणकारी योजनाओं के बारे में बताया, लेकिन अजय की मानें तो उसकी मां ने उसे खुद पर विश्वास रखने की सीख दी है। मां शारदा देवी अजय की दैनिक क्रियाओं से जुडे़ कार्यों में उसकी सहायता करती है। मां घरों में जाकर साफ-सफाई करती है और अजय खुद संत जनू बाबा कॉलेज में नौकरी करता है।
विकास भवन स्थित समाज कल्याण विभाग में आगे की पढ़ाई के लिए छात्रवृत्ति की जानकारी करने आए अजय ने जंतु विज्ञान से एमएससी करने की इच्छा है। एमएससी की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद वह यूजीसी नेट आदि की तैयारी करेगा।