बिचपुरी। आरबीएस इंजीनियरिंग टेक्निकल कैंपस के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के अंतिम वर्ष के छात्रों ने ऐसा स्मार्ट ग्लास तैयार किया है, जो दृष्टिबाधितों के लिए आंख का काम कर सकता है। दिव्य दृष्टि नाम का यह प्रोजेक्ट न केवल मुद्रित भाषा को आवाज में बदलता है, बल्कि आसपास के माहौल को समझने में भी रियल-टाइम मदद देता है।
संस्थान के निदेशक (एकेडमिक) डॉ. बृजेश कुमार सिंह ने बताया कि इस इनोवेशन को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, उत्तर प्रदेश (सीएसटी-यूपी) की इंजीनियरिंग ग्रांट स्कीम 2025-26 में चयनित किया गया और लखनऊ में प्रदर्शित भी किया गया। इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के अंतिम वर्ष के छात्र अमन शर्मा और ध्रुव वर्मा ने डीन डॉ. जय कुमार के मार्गदर्शन में यह प्रोजेक्ट विकसित किया। स्मार्ट ग्लास में कैमरा मॉड्यूल के जरिए इमेज कैप्चर होती है, जिसे रास्पबेरी पाई कंट्रोलर प्रोसेस करता है। इसके बाद स्पीकर या ईयरफोन के माध्यम से यूजर को ऑडियो आउटपुट मिलता है।
दिव्य दृष्टि प्रोजेक्ट के जरिए दृष्टिबाधित व्यक्ति न सिर्फ पढ़-सुन सकते हैं, बल्कि आसपास मौजूद लोगों के चेहरे की पहचान भी कर सकते हैं। इससे उनकी रोजमर्रा की जिंदगी में आत्मनिर्भरता बढ़ने की उम्मीद है। निदेशक डॉ. बृजेश कुमार सिंह ने कहा कि यह तकनीक दृष्टिबाधितों की दैनिक चुनौतियों को कम करने के साथ उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभाएगी। निदेशक (वित्त एवं प्रशासनिक) डॉ. पंकज गुप्ता ने प्रोजेक्ट की सफलता पर छात्रों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। प्रोजेक्ट को साकार करने में विभाग के शिक्षकों डॉ उपेंद्र पाल सिंह, इंजी उपासना सपरा, इंजी. संजय कुलश्रेष्ठ और इंजी सौम्या सिंह का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है।