उत्तर प्रदेश के आगरा में मंडलायुक्त रितु माहेश्वरी ने मंटोला और छीपीटोला सहित अन्य इलाकों में घरों में चल रही जूता फैक्टरियों से निकलने वाले लेदर के कचरे को नाले और सड़कों पर डालने वालों पर जुर्माना लगाने के निर्देश दिए। ऐसे घरों को लेखपाल चिह्नित करेंगे। पेठा वेस्ट फेंकने वाली इकाइयों पर भी चिह्नित करके कार्रवाई होगी। पशुओं को खुला छोड़ने वाले पशुपालकों पर अब निगम निगम दोगुना जुर्माना लगाएगा। दूसरी बार पकड़े जाने पर पशु जब्त किया जाएगा।
छावनी बोर्ड के खत्ताघर से 30 हजार मीट्रिक टन कचरे के निस्तारण का निर्देश दिया गया था। सात में महीने में महज दो हजार मीट्रिक टन कचरे का ही निस्तारण किया गया है। कैंट बोर्ड की इस लापरवाही पर मंडलायुक्त ने नाराजगी जताई। यूपीसीबी के अधिकारियों से कहा कि भूमिगत जल और वायु प्रदूषण की जांच करके जुर्माना लगाएं। उनहोंने 31 मार्च तक अवशेष कचरे का पूरी तरह निस्तारण करने या नगर निगम को धनराशि देने के निर्देश दिए। कैंट बोर्ड की शिथिलता की सूचना एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट को भी देने का निर्देश दिया गया।
मंडलायुक्त ने कहा कि जिस दुकान के सामने लेदर वेस्ट जलता मिले, उस दुकानदार पर जुर्माना लगाया जाए। यूपीसीबी के अफसरों ने बताया कि बायोमेडिकल वेस्ट के निस्तारण में 1100 में से 700 अस्पतालों ने ही बारकोडिंग की है। इस पर मंडलायुक्त ने शेष 400 अस्पतालों को नोटिस देने और पंजीकरण निरस्त करने के साथ ही जुर्माना लगाने के निर्देश दिए।
संजय प्लेस में एक माह के भीतर सभी प्रतिष्ठानों को सीवर कनेक्शन के लिए नोटिस देने को कहा। कनेक्शन नहीं लेने वालों पर जुर्माना लगाने के आदेश यूपीसीबी को दिए। नाला टैंपिंग की समीक्षा की गई। इसमें बताया गया कि धांधुपुरा, पीलाखार व नगला बूढ़ी के एसटीपी की क्षमता बढ़ाई जा रही है। प्रतिमाह रिपोर्ट देने को कहा गया। गंगाजल प्रोजेक्ट की समीक्षा में यमुनापार की डीपीआर तैयार होने की बात बताई गई।