फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव से बसपा बाहर

Sat, 26 Dec 2015 01:57 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
विज्ञापन
विज्ञापन
जिला पंचायत अध्यक्ष पद चुनाव में बसपा का प्रत्याशी नहीं होगा। बसपा जोनल कार्डिनेटर सुनील कुमार चित्तौड़ ने साफ कर दिया है कि सात जनवरी को होने वाले मुकाबले में कोई प्रत्याशी मैदान में नहीं होगा। उधर बसपा के हट जाने के बाद अब सपा और भाजपा में सीधी टक्कर हो गई है। चुनावी इतिहास देखते हुए लग रहा है कि हार-जीत का फैसला इस बार भी धनबल और बाहुबल के दम पर होगा। ऐसे में बसपा समर्थन से जीते सदस्यों की बल्ले-बल्ले हो गई है। पार्टी के मुकाबले से हटते ही उनके भाव बढ़ गए हैं।
विज्ञापन

जिला पंचायत सदस्य चुनाव के बाद बसपा ने 18 सदस्य अपने बताए थे। इनके अलावा आठ के समर्थन बताते हुए 26 का साथ होने का दावा किया था। 51 सदस्यीय जिला पंचायत में बहुमत का जादुई आंकड़ा भी 26 ही है। सूत्रों की मानें तो पिछले दिनों लखनऊ में बैठक के बाद अध्यक्ष पद के लिए बसपा प्रत्याशी के नाम का एलान करने वाली थी। तीन सदस्यों ने दावेदारी पेश की थी,  लेकिन पार्टी नेताओं का रुख देखते हुए सभी ने पैर पीछे खींच लिए।
उधर सपा ने राजपाल यादव की पत्नी कुशल यादव का नाम घोषित किया तो भाजपा ने सांसद बाबूलाल के पुत्र राकेश चौधरी का। इसके बाद बसपा नेताओं ने प्रत्याशी न उतारने का फैसला कर लिया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि जीते हुए सदस्य अध्यक्ष पद पर चुनाव लड़ने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे। इसके चलते मुकाबले की तस्वीर अब पूरी तरह से साफ हो गई है।
विज्ञापन

कुशल यादव और राकेश चौधरी के बीच आमने सामने की टक्कर है।  एक तरफ कुशल के पति राजपाल ने सत्ता के दम पर पूरी ताकत लगा दी है तो, दूसरी ओर सांसद बाबूलाल भी साम, दाम, दण्ड, भेद में पीछे हटने वाले नहीं। देखना दिलचस्प होगा कि भारी कौन पड़ता है। बसपा से खुली छूट पाने वाले सदस्य जिस ओर हो जाएंगे, उसी के सिर पर अध्यक्ष का ताज और गाड़ी पर लालबत्ती लग जाएगी।
डील की चलने लगीं चर्चाएं
पिछले पंचायत अध्यक्ष चुनाव में बसपा के समर्थन से 17 सदस्य जीते थे, लेकिन पार्टी ने ताकत के साथ चुनाव लड़ा। यही नहीं, कलेक्ट्रेट में सपा और बसपा नेताओं के बीच गोलियां भी चलीं थीं, लेकिन इस बार ज्यादा सदस्यों के समर्थन के बाद भी बसपा का अध्यक्ष पद पर प्रत्याशी न लड़ाने का फैसला खुद बसपाइयों को भी चौंका रहा है। दबी जुबान से कई नेताओं ने इसके लिए डील होने की चर्चाओं को आगे बढ़ाया, लेकिन पार्टी नेता और जोनल कार्डिनेटर सुनील चित्तौड़ ऐसी कोई डील होने से इंकार करते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे आरोप अर्नगल हैं। सत्ता के दुरुपयोग और बाहुबल को देखते हुए ही चुनाव से हटा गया है।
जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव सत्ता और बाहुबल का चुनाव है। जिस तरह की धांधली सदस्य के चुनाव में हुई है, उसे देखते हुए पार्टी अध्यक्ष पद पर प्रत्याशी नहीं उतारेगी। जनता ने हमें सबसे ज्यादा समर्थन दिया, फिर भी अध्यक्ष पद चुनाव से हमारी पार्टी दूर रहेगी - सुनील चित्तौड़ (जोनल कार्डिनेटर, बसपा)
पार्टी ने जिस सदस्य का नाम अध्यक्ष पद का प्रत्याशी बनाने के लिए फाइनल किया गया था, उसी को धमकियां मिलनी शुरू हो गईं । इसके अलाव गणेश यादव को जिस तरह से हराया गया, उससे अध्यक्ष चुनाव में ईमानदारी की उम्मीद नहीं रह गई - डा. मलखान सिंह व्यास ( जिलाध्यक्ष, बसपा )
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें