जिले में संचालित अधिकांश सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और अन्य स्वास्थ्य केंद्र अवैध हैं। यह अलग बात है कि सरकारी होने के कारण इन पर अब तक शिकंजा नहीं कसा गया। इन ‘मौत’ के ठिकानों पर नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। साथ ही पर्यावरण से भी खिलवाड़ किया जा रहा है। मानक पूरे न होने पर कर्मचारी भविष्य निधि अस्पताल के लाइसेंस को उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) पहले ही निरस्त कर चुका है।
सरकारी विभाग निजी अस्पतालों, क्लीनिक, पैथोलॉजी पर तो महरबान है ही, सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों को भी खुली छूट दे रखी है। पिछले दिनों सूचना का अधिकार के तहत मांगी जानकारी में यह खुलासा हुआ है। यह सूचना आरटीआई एक्टिविस्ट शबी हैदर जाफरी ने यूपीपीसीबी से मांगी थी।
जवाब मिला है कि जिले में संचालित सीएचसी, पीएचसी तथा अन्य स्वास्थ्य केंद्र यूपीपीसीबी के अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) के बगैर संचालित हो रहे हैं। इस संबंध में कोई रिकॉर्ड भी उनके पास नहीं है। आलम यह है कि यूपीपीसीबी के लाइसेंस निरस्त करने के बाद भी कर्मचारी भविष्य निधि अस्पताल संचालित है। बता दें कि सरकारी अस्पतालोें और स्वास्थ्य केंद्रों का हाल किसी से छुपा नहीं है। यहां मरीज मजबूरी में ही जाता है। ऐसे में मानकों की यह अनदेखी पर्यावरण पर भी भारी पड़ रही है।
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हाईकोर्ट में देना होगा जवाब
शबी हैदर ने स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। इसमें निजी अस्पतालों, क्लीनिक और पैथोलॉजी में नियमों की अनदेखी पर सवाल उठाया था। इसी कड़ी में सरकारी अस्पतालों की भी पोल खुल गई। यूपीपीसीबी की यह रिपोर्ट वह हाईकोर्ट में 31 मार्च को होने वाली सुनवाई के दौरान पेश करेंगे।
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कहां जा रहा मेडिकल वेस्ट
बहुत से निजी अस्पतालों के साथ-साथ सरकारी अस्पताल भी पर्यावरण के लिए खतरा बने हुए हैं। इनमें मेडिकल वेस्ट के निस्तारण की व्यवस्था नहीं है। इसके समाधान के लिए वर्ष 1998-99 में सरकार ने दो-दो लाख रुपये स्वास्थ्य केंद्रों के आसपास गड्ढा खोदवाने के लिए आवंटित किए थे। ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में मेडिकल वेस्ट इन्हीं गड्ढों में डाला जाए। मगर, शायद ही ऐसा कोई स्वास्थ्य केंद्र होगा जहां गड्ढा हो। खुले में ही मेडिकल वेस्ट फेंका जा रहा है।
वर्जन
अभी तक सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों के पास प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एनओसी नहीं थी। इसके लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
- डा. आनंद वर्मा, मुख्य चिकित्साधिकारी
सरकारी अस्पतालों में अनियमितताओं के मामले को हाईकोर्ट के समक्ष रखा जाएगा। लोगों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा।
- शबी हैदर जाफरी, जनहित याचिकाकर्ता
सरकारी अस्पतालों में भी मेडिकल वेस्ट के निस्तारण की कोई व्यवस्था नहीं है। यह अस्पताल मरीजों के साथ-साथ पर्यावरण को खासा नुकसान पहुंचा रहे हैं।
- डीके जोशी, सदस्य, अनुश्रवण समिति