तीन दिन आई आंधी ने शहर में भारी तबाही मचा दी। क्या पेड़ और क्या होर्डिंग, ताश के पत्तों की तरह सड़कों पर बिछ गए। तूफान तो शांत है, लेकिन उन तमाम लोगों के दिलों की धड़कन बढ़ गई हैं जो जर्जर इमारतों में जिंदगी बसर कर रहे हैं। दरार पड़ी दीवारों के बीच बस दहशत में दिन गुजारने को मजबूर हैं। नगर निगम ऐसे चार दर्जन से अधिक भवन चिह्नित कर चुका है।
मुगलकाल के समय में विकसित हुए शहर में निर्माण भी बहुत पुराने हैं। कुछ निर्माणों की उम्र भी पूरी हो चुकी है। काफी जर्जर हो चुके हैं। आंधी और बारिश में कभी भी ढह सकते हैं। शहर में ऐसे भवनों की संख्या काफी ज्यादा है। नगर निगम चार दर्जन से अधिक भवनाें से अप्रिय घटना की संभावना जता चुका है। पिछले साल राम बारात और इस साल अंबेडकर जयंती से पहले इन जर्जर भवनों के स्वामियों को नोटिस भी जारी किए जा चुके हैं। चेतावनी देते हुए कहा था कि इन भवनों की छतों पर किसी को न चढ़ने दिया जाए।
कई मल्टीस्टोरी बिल्डिंगों में भी दरारें
शहर में ऐसे भी तमाम मल्टीस्टोरी बिल्डिंग हैं, जिनमें दरारें आ चुकी हैं। हालांकि ये पूरी तरह से जर्जर नहीं हैं लेकिन खतरे का सबब बनी हुई हैं। मरम्मत न होने की वजह से इनमें पड़ी दरारें बढ़ती जा रही हैं।