बिचपुरी। सदर तहसील क्षेत्र के गांव लड़ामदा में नहर की गूल को लेकर चल रहे विवाद के संबंध में जिलाधिकारी से शिकायत की गई है। इसमें भूमि पर नहर की गूल होने के दावे को गलत बताते हुए प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है।
शिकायतकर्ता गौरव अग्रवाल पुत्र मनोज कुमार अग्रवाल निवासी नंदनपुरम, दहतोरा ने बताया है कि लड़ामदा गांव में खसरा संख्या 307 व 313 को उनके पिता ने लगभग 15 वर्ष पूर्व क्रय किया था। तत्कालीन उपजिलाधिकारी सदर के आदेश 16 नवंबर 2012 के अंतर्गत उक्त भूमि अकृषक घोषित हो चुकी है। उन्होंने कहा कि खरीद के समय से ही दोनों खसरों पर बाउंड्रीवॉल निर्मित थी। इनके मध्य किसी प्रकार की नहर की गूल अथवा चक मार्ग मौजूद नहीं था। गौरव अग्रवाल ने कहा कि पीछे स्थित खेतों के काश्तकारों द्वारा अपने खेत तक पहुंच के लिए उक्त भूमि से रास्ता मांगा जा रहा है, जिससे विवाद की स्थिति बनी हुई है। इसके समर्थन में वर्ष 2015 के राजस्व एवं सिंचाई विभाग के पत्रों का हवाला देते हुए कहा गया है कि सरकारी अभिलेखों में दोनों खसरों के बीच किसी नहर की गूल का कोई उल्लेख नहीं है। कहा कि पूर्व में सिंचाई एवं राजस्व विभाग के अधिकारियों द्वारा मौके पर पहुंचकर अभिलेखों के आधार पर स्थिति की पुष्टि की जा चुकी है। वहीं हाल में प्रस्तुत की गई एक रिपोर्ट को तथ्यों के विपरीत बताया है। गौरव अग्रवाल ने जिलाधिकारी से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच किसी अन्य सक्षम अधिकारी से कराए जाने तथा अभिलेखों के आधार पर स्थिति स्पष्ट किए जाने की मांग की है।
वर्जन
पेट्रोल पंप स्वामी ने गूल को बंद कर दिया है। इस कारण आसपास के खेतों में सिंचाई का पानी नहीं पहुंच पा रहा है। इस संबंध में डीसी मनरेगा के साथ मौके पर जाकर जांच की गई थी, जिसमें कुलावे को पुनः खोलने की रिपोर्ट दी गई है, ताकि किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जा सके। नक्शे में गूल का दर्ज होना आवश्यक नहीं है। गूल की देखरेख और रखरखाव की जिम्मेदारी खंड विकास अधिकारी और संबंधित ग्राम पंचायत की होती है।
अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग नीरज कुमार सिंह