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Agra News: दीप्ति-ध्रुव की धरती पर मायूसी, क्रिकेट पर लगा कॉमनवेल्थ का ब्रेक

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जीतू व चंद्रशेखर
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आगरा। जिस खेल ने बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स-2022 में करोड़ों क्रिकेट प्रेमियों को रोमांचित किया और भारतीय महिला टीम को ऐतिहासिक रजत पदक दिलाया, वही क्रिकेट अब 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स का हिस्सा नहीं होगा। इस फैसले की गूंज आगरा तक सुनाई दी है। दीप्ति शर्मा, ध्रुव जुरेल, दीपक चाहर और राहुल चाहर जैसे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटरों की धरती आगरा में खिलाड़ियों और कोचों ने इसे निराशाजनक बताया है। उनका कहना है कि यह युवा खिलाड़ियों के सपनों पर ब्रेक लगाना है।
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कॉमनवेल्थ गेम्स-2026 के आयोजकों ने सीमित बजट और छोटे प्रारूप के चलते क्रिकेट को प्रतियोगिता से बाहर रखने का फैसला किया है। बर्मिंघम-2022 में पहली बार महिला टी-20 क्रिकेट शामिल किया गया था, जहां भारत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक अपने नाम किया था। उस सफलता के बाद उम्मीद थी कि क्रिकेट भविष्य में भी कॉमनवेल्थ का नियमित हिस्सा रहेगा, लेकिन इस फैसले ने खिलाड़ियों की उम्मीदों को झटका दिया है।
वरिष्ठ क्रिकेट कोच अतुल सोलंकी ने कहा कि क्रिकेट को बाहर करना निराशाजनक है। यूनिवर्सिटी क्रिकेट टीम के पूर्व सदस्य डॉ. चंद्रशेखर शर्मा ने कहा कि कॉमनवेल्थ गेम्स केवल पदक जीतने का मंच नहीं, बल्कि खिलाड़ियों के आत्मविश्वास और पहचान का भी बड़ा अवसर होता है। युवा क्रिकेटर जीतू कश्यप ने कहा कि क्रिकेट दुनिया के सबसे लोकप्रिय खेलों में है। इसे कॉमनवेल्थ से बाहर देखना अच्छा नहीं लगा। उम्मीद है कि भविष्य में इसे फिर शामिल किया जाएगा ताकि खिलाड़ियों को और बड़े अवसर मिल सकें।
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दीप्ति शर्मा जैसी खिलाड़ियों के लिए भी कम हुआ एक मंच
आगरा की स्टार ऑलराउंडर दीप्ति शर्मा ने पिछले कुछ वर्षों में भारतीय महिला क्रिकेट को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। यदि क्रिकेट कॉमनवेल्थ गेम्स का हिस्सा बना रहता तो उनके पास भी देश के लिए एक और खेल प्रतियोगिता में पदक जीतने का अवसर होता। आगरा के क्रिकेट प्रेमियों का मानना है कि दीप्ति जैसे खिलाड़ियों की उपलब्धियां ही युवाओं को प्रेरित करती हैं और ऐसे मंच उनके सपनों को नई उड़ान देते हैं।
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अब ओलंपिक पर टिकी उम्मीदें
कॉमनवेल्थ गेम्स से क्रिकेट बाहर हो गया है, लेकिन 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक में क्रिकेट की वापसी तय मानी जा रही है। ऐसे में आगरा के खिलाड़ियों की निगाहें अब ओलंपिक पर टिक गई हैं। उनका मानना है कि क्रिकेट की वैश्विक लोकप्रियता को देखते हुए भविष्य में कॉमनवेल्थ गेम्स में भी इसकी वापसी होनी चाहिए, ताकि खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का एक और बड़ा मंच मिल सके।

जीतू व चंद्रशेखर

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