चौराहों पर धूल के गुबार, पटाखों का धुआं और फिर बदलते मौसम में सुबह-शाम छाने वाला धुंध। इसने लोगों के लिए मुसीबत खड़ी कर दी। प्रदूषण का आलम ऐसा कि सामान्य व्यक्ति को भी सांस लेने में दिक्कत हो रही है।
एसएन मेडिकल कालेज के क्षय एवं वक्ष रोग विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें, तो बीते पांच दिनों में ओपीडी में मरीजों की संख्या 35-45 फीसदी बढ़ गई है। अमूमन 100-110 मरीजों की रहने वाली ओपीडी 150 तक पहुंच रही है। खास बात है, इसमें छाती का संक्रमण, सांस रोगियों की संख्या 65 प्रतिशत है, जिसमें 30 प्रतिशत नए मरीज हैं।
वरिष्ठ चिकित्सक डा. जीवी सिंह बताते हैं कि धूल के कण सांस नलिकाओं में जाने से संक्रमण फैलता है। इस हालत में मरीज को पीला बल्गम, खांसी, छाती में जकड़न, हल्के दर्द की शिकायत रहती है। सांस रोगियों में सीने में दर्द, सांस लेने में दिक्कत, कुछ दूरी तय करने पर सांस फूलने जैसी समस्या है। मौसम बदलने पर पुराना मर्ज भी उखड़ रहा है। बाहर जाते वक्त मास्क लगाएं, अस्थमा मरीज इन्हेलर की डोज बढ़ा दें। दवाएं बंद कर रखी हैं, तो चिकित्सकीय परामर्श के बाद शुरू करें।
आंखों में जलन, पानी बह रहा
धूलयुक्त धुंध से सांस रोगी ही नहीं आंखों के लिए भी नुकसानदेह है। इन दिनों एसएन, और जिला अस्पताल के अलावा प्राइवेट डाक्टरों पर भी मरीज बढ़े हैं। बढ़े मरीजों में आंखों में जलन, पानी बहना, दर्द, चिपचिपाहट, खुजली जैसी शिकायत हैं। वरिष्ठ चिकित्सक डा. समीर प्रकाश बताते हैं कि नए मरीजों में हर दूसरा मरीज यही है। बाहर जाते वक्त चश्मा लगाएं, सुबह-शाम धुंध ज्यादा रहता है, जरूरी होने पर ही बाहर निकलें। चिकित्सक परामर्श से आईड्राप इस्तेमाल करें।