मैनपुरी। दिहुली नरसंहार में बेशक तीन दोषियों को फांसी की सजा हो गई है। मगर, 24 लोगों की सामूहिक हत्याकांड के मुकदमे में तीन अभियुक्त ऐसे हैं, जो 44 साल में कभी भी पकड़े नहीं गए। दरअसल, 44 साल से फरार लक्ष्मी, इंदल और रुखन के नाम तो चार्जशीट में दर्ज हैं। मगर, इनके पते के संबंध में कुछ भी उल्लेख नहीं है। इनके परिजन भी कभी सामने नहीं आए। यह तीनों जिंदा हैं या मर गए इसका भी किसी के पास जवाब नहीं है। सवाल खड़ा होता है कि क्या विवेचक ने त्रुटि की या 15 हजार से अधिक पन्नों की फाइल, जिसके कई पन्ने समय के साथ धुंधले हुए उनमें इनका पता खो गया। बहरहाल, तथ्य जो भी हो, लेकिन इन सबके बीच कोर्ट में इन तीनों की फाइल अब इनकी गिरफ्तारी या फिर मृत्यु संबंधी रिपोर्ट आने तक प्रचलित रहेगी।
इस मुकदमे की फाइल में एक स्थान पर लक्ष्मी के पिता के नाम के तौर पर भजन लाल तेली का उल्लेख मिलता है। मगर, इंदल और रुखन के पिता का भी नाम दर्ज नहीं है। लक्ष्मी एफआईआर में नामजद था। रुखन और इंदल को पुलिस की विवेचना में प्रकाश में लाया गया था। 18 नवंबर 1981 को हुई इस वारदात में पुलिस ने मुकदमा दर्ज करने के बाद 26 फरवरी 1982 को चार्जशीट कोर्ट में पेश की थी। राधे-संतोषा सहित 15 अभियुक्तों की गिरफ्तारी उस वक्त तक हो चुकी थी।